भारत में न्यूनतम मजदूरी पड़ोसी देशों से भी कम

नई दिल्ली : इंटरनेशनल लेबर आर्गनाइजेशन (आईएलओ) की नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के मजदूरों पर कोरोना माहामारी और लॉकडाउन की मार गंभीर है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के वेतन में 22.6 फीसदी की कमी आई है जबकि संगठित क्षेत्र के नौकरीपेशा लोगों की सैलरी भी 3.6 फीसदी तक घट गयी है। इस दौरान भारत में न्यूनतम मजदूरी नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका से भी कम हो गयी है। भारत के लोगों की खरीदने की क्षमता भी अब बांग्लादेश और सोलोमन आइलैंड जैसे देशों से भी कम हो गयी है।

काेरोना का कहर पड़ा भारी

रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया का न्यूनतम औसत मासिक वेतन 9720 है जबकि भारत में ये सिर्फ 4300 रुपये प्रति महीना ही बना हुआ है। कम वेतन वालों पर कोविड लॉकडाउन का ज्यादा प्रभाव पड़ा है जिसका सीधा सा मतलब यही है कि इससे समाज में असामनता भी बढ़ी है। मनोरंजन, खेल और पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्र जो सबसे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं आमतौर पर अधिक महिलाओं को रोजगार देते हैं। आमदनी के निचले आधे हिस्से वाले श्रमिकों को अपनी मजदूरी का 17.3% नुकसान हुआ है जबकि वैश्विक वास्तविक वेतन वृद्धि में 1.6 से 2.2 प्रतिशत के बीच उतार-चढ़ाव हुआ। 2020 की दूसरी तिमाही में 28 यूरोपीय देशों में बिना सब्सिडी के महिलाओं को वेतन में 8.1 प्रतिशत का नुकसान हुआ। वहीं पुरुषों को 5.4 प्रतिशत का नुकसान हुआ।

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