गिर ही गई कमलनाथ सरकार, परीक्षण से पहले ही इस्तीफा

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भोपाल : मध्य प्रदेश में जारी सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शक्ति परीक्षण किए बिना ही राज्यपाल लालजी टंडन को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। शुक्रवार को संभावित शक्ति परीक्षण से पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पत्रकार सम्मेलन में कहा कि वह आज राज्यपाल लालजी टंडन को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। मध्य प्रदेश में शुक्रवार दोपहर 12 बजे शुरू हुई पत्रकार सम्मेलन में कमलनाथ ने भाजपा पर सरकार गिराने की साजिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की जनता धोखा देने वाले बागियों को माफ नहीं करेगी। साथ ही उन्होंने कहा, वह आज राज्यपाल से मुलाकात करने के बाद अपना इस्तीफा सौंपेंगे। दरअसल, शीर्ष न्यायालय ने मध्य प्रदेश पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कमलनाथ सरकार को शुक्रवार 5.00 बजे तक शक्ति परीक्षण कराने का आदेश दिया था, जिसके बाद कमलनाथ सरकार को शक्ति परीक्षण कराना था। लेकिन इस शक्ति परीक्षण से पहले ही कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी, क्यों​कि उनके पास बहुमत लायक विधायक बल ही नहीं था।

जरूरत 104 की, विधायक बचे 92 

मध्य प्रदेश में विधानसभा में 230 सीटें हैं। इनमें से 2 सीटें खाली हैं। शेष 228 में से कांग्रेस के 114 विधायक थे। भारतीय जनता पार्टी को 107 सीटें मिली थीं। कांग्रेस को बसपा व निर्दलियों समेत 7 और विधायकों का समर्थन प्राप्त था। लेकिन जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही गंदी राजनीति कर उन्हें राज्यसभा में जाने से रोकने की साजिश कांग्रेस के दिग्गजों ने रची, तभी सिंधिया भाजपा में चले गए थे और साथ ही 22 कांग्रेसी विधायक बागी हो गए थे। ये बागी कर्नाटक में एक होटल में चले गए थे और विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफे भेज दिए थे। सरकार बचाने के लिए ​कमलनाथ ने ऐड़ी-चोटी का जोर लगाया। दिग्विजय ने वहां जाकर बागियों को मनाने की कोशिश की, लेकिन बागी विधायकों ने उनसे मिलने से मना कर दिया। कमलनाथ ने जितना संभव हो सकता था, बहुमत परीक्षण को उतना टालने की कोशिश की, लेकिन गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कह दिया कि शुक्रवार शाम 5 बजे से पहले फ्लोर टेस्ट करा लें।

शीर्ष न्यायालय ने वीडियो लिंक द्वारा बात करने का दिया था सुझाव

शीर्ष न्यायालय ने शुक्रवार को अपने आदेश में कमलनाथ सरकार को 20 मार्च को शाम 5.00 बजे तक शक्ति परीक्षण पास करने का आदेश दिया था। शीर्ष न्यायालय ने इससे पहले गुरुवार को कहा था कि यदि बागी विधायक शक्ति परीक्षण के लिए विधानसभा में आना चाहते हैं, तो कर्नाटक और मध्य प्रदेश के डीजीपी बागी विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराए। इस दौरान शीर्ष न्यायालय ने यह प्रस्ताव भी दिया था कि बागी विधायकों से वीडियो लिंक के जरिए बात करने का या उन्हें बंधक बनाने के भय को दूर करने के लिए एक पर्यवेक्षक नियुक्त की जा सकती है। शीर्ष न्यायालय ने आदेश में कहा कि विधानसभा का एकमात्र एजेंडा बहुमत साबित करने के लिए होगा और किसी के लिए कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।

राज्यपाल ने बढ़ाया था शक्ति परीक्षण का समय

इससे पहले मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने कमलनाथ सरकार से विधानसभा में शक्ति परीक्षण करने के लिए कहा था। हालांकि, स्पीकर ने फिर कोरोना वायरस का हवाला देते हुए 26 मार्च तक के लिए सदन को स्थगित कर दिया। लेकिन शीर्ष न्यायालय ने स्पीकर के फैसले को पलट दिया और शुक्रवार शाम 5.00 बजे तक कमलनाथ सरकार को शक्ति परीक्षण का आदेश दिया।

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