नेपाल अपने कदम संभाल, आगे चीन का कर्ज जाल

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नई दिल्‍ली : क्षेत्रीय प्रभुत्व स्थापित करने के लिए चीन अपने से कमजोर सभी पड़ोसी देशों – बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका व म्‍यांमार – के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है। इसी संदर्भ में चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि नेपाल को चीन से जुड़े मसलों में बेहद सतर्कता बरतनी चाहिए। जनरल रावत ने श्रीलंका का नाम लिया और कहा कि नेपाल को पुराने अनुभवों से सीखना चाहिए। रावत का इशारा उन देशों की तरफ था जिन्‍हें चीन ने इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रॉजेक्‍ट्स का लालच दिखाकर कर्ज के जाल में फंसा लिया है।

भारत नेपाल के बीच सांस्कृतिक संबंध

जनरल रावत ने कहा कि भारत और नेपाल के रिश्‍ते विकसित होने में सदियां लगी हैं। उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों में शांति और समृद्धि के लिए रिश्‍ते और मजबूत होना जरूरी है। वह नई दिल्‍ली में सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्‍टडीज और नेपाल इंस्टिट्यूट ऑफ इंटरनैशनल कोऑपरेशन ऐंड एंगेजमेंट के सालाना इवेंट को संबोधित कर रहे थे। वर्तमान समय में, नेपाल अपनी स्‍वतंत्र नीति के आधार पर चीन समेत अन्‍य देशों के लिए दरवाजे खोल रहा है।

चीन से दूर रहने की चेतावनी

अंतरराष्‍ट्रीय मामलों में नेपाल अपने मन की करने के लिए स्‍वतंत्र है लेकिन उसे सतर्क रहना चाहिए और श्रीलंका और कुछ अन्‍य देशों के कुछ मामलों से सीखना चाहिए जिन्‍होंने क्षेत्र में अन्‍य देशों संग समझौते किए। रावत के बयान से पहले पिछले दो महीनों में उच्‍च स्‍तर के तीन नेपाल दौरे हो चुके हैं। भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला और रिसर्च ऐंड एनालिसिस विंग चीफ सामंत कुमार गोयल नेपाल होकर आ चुके हैं। इसी महीने नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्‍यावली को भारत आना है।

कर्ज देकर पड़ोसियों को फांसता है चीन

चीन ने दुनिया के कई देशों को सब्‍जबाग दिखाकर लूटा है। श्रीलंका, मालदीव और म्‍यांमार इसके उदाहरण हैं। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की सरकार और उसकी कंपनियों ने 150 से ज्यादा देशों को 1.5 ट्रिलियन डॉलर यानी 112 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का लोन दिया है। चीन अपने शिकार को इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बढ़ाने का लालच देता है और उन्‍हें कर्ज के जाल में फांस लेता है। जब वह देश इस कर्ज को चुकाने में सक्षम नहीं होते तो वह उनके संसाधनों पर कब्जा करना शुरू कर देता है। एक्‍सपर्ट इसे ‘डेट ट्रैप डिप्लोमेसी’ का नाम देते हैं। पिछले दिनों लाओस को अपना पावर ग्रिड चीन की सरकारी कंपनी को सौंपना पड़ गया था। इसके अलावा, मालदीव पर चीन का 3.1 अरब डॉलर का भारी-भरकम कर्ज है।

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