कट्टरपंथियों पर हल्ला बोल, खुलकर फ्रांस के समर्थन में उतरा भारत

नई दिल्ली: फ्रांस और मुस्लिम देशों के बढ़ते तनाव के बीच भारत ने फ्रांस को अपना समर्थन दिया है। बता दें कि फ्रांसीसी राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों के धर्मनिरपेक्षता और इस्लाम संबंधी बयान को लेकर इस्लामी चरमपंथियों ने विरोध में बॉयकॉट फ्रांस का कैंपेन तेज कर दिया है। भारत ने ट्विटर द्वारा फ्रांस को खुला समर्थन देते हुए मैक्रों के खिलाफ व्यक्तिगत हमले को अंतरराष्ट्रीय विमर्श के सबसे बुनियादी मानकों का उल्लंघन बताया। भारत से मिले समर्थन पर फ्रांस ने भी आभार जताते हुए कहा कि दोनों देश आतंकवाद की लड़ाई में एक-दूसरे पर भरोसा कर सकते हैं।

भारत ने आतंकवाद पर साधा निशाना

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में जारी एक बयान में फ्रांस में हुए बर्बर आतंकवादी हमले की भी निंदा की जिसमें ईशनिंदा के नाम पर एक शिक्षक सैम्यूल पैटी का सर कलम कर दिया गया था। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी वजह से और किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता। बयान में कहा गया कि, ‘हम बर्बर आतंकवादी हमले में फ्रांस के एक शिक्षक की निर्ममता से हत्या किए जाने की भी निंदा करते हैं, जिसने पूरे विश्व को स्तब्ध कर दिया। हम उनके परिवार और फ्रांस के लोगों के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं।’ मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘हम राष्ट्रपति इम्मैन्युअल मैक्रों पर अस्वीकार्य भाषा में किए गए व्यक्तिगत हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय विमर्श के सबसे बुनियादी मानकों का उल्लंघन है।’


फ्रांस ने धन्यवाद दिया:

मुस्लिम मीडिया ने मैक्रों को दिखाया राक्षस

बता दें कि मैक्रों इस्लामी कट्टरपंथियों पर कड़े रुख और पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों का ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर बचाव करने को लेकर मुस्लिम बहुल देशों की आलोचना का तगड़ा सामना कर रहे हैं। ईरान की मीडिया में तो मैक्रों को ‘राक्षस’ बताकर उनको ‘इस्लाम का दुश्मन’ घोषित कर दिया। कुवैत, जॉर्डन, कतर और तुर्की ने फ्रांस के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश भी उनके साथ हो लिए हैं। बता दें कि सोमवार को तुर्की के आह्वान पर कई खाड़ी देशों ने फ्रांस के उत्पादों के बहिष्कार का ऐलान किया। कुवैत में रिटेल चेन चलाने वाले समूह ने अपनी दुकानों से फ्रांस की कंपनियों के प्रोडक्ट्स हटा लिए हैं।

क्या है पूरा मामला

16 अक्टूबर को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाते हुए छात्रों को पैगंबर मोहम्मद का विवादित कार्टून दिखाने वाले टीचर सैमुअल पैटी का गला काट कर हत्या कर दी गयी। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने टीचर सैमुएल पैटी की हत्या को ‘इस्लामी आतंकवाद’ करार देते हुए कहा कि ‘इस्लाम हमारा भविष्य हथियाने का इरादा रखता है, जो कभी नहीं होगा।’ तब से ​ लेकर अब तक यह घटना राजनीतिक रूप ले चुकी है जहां मुस्लिम देशों में फ्रांस के विरोध में प्रदर्शन कर उनके प्रोडक्ट्स के बहिष्कार का अभियान छेड़ दिया है।

बताते चलें कि मुस्लिम देशों ने फ्रांस पर नस्लवाद, इस्लामोफोबिया और फासिस्ट रवैये के आरोप लगाए गए हैं। पैगंबर मोहम्मद के कार्टूनों के मुद्दे पर पूरा मुस्लिम वर्ल्ड फ्रांस के खिलाफ लामबंद हो कर खड़ा हो गया है।

फ्रांस गलवान झड़प में भारत के साथ खड़ा था

बता दें कि फ्रांस की रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने गलवान वैली की हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों का शहादत पर दुख जताया है। फ्रांस की रक्षामंत्री ने भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सोमवार एक चिट्ठी लिखते हुए कहा कि, ‘भारतीय जवानों को खोना बेहद दुखद है, ना सिर्फ जवानों के परिवारों के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए। इन कठिन परिस्थितियों में फ्रांसीसी सशस्त्र बलों के साथ अपने दृढ़ और मैत्रीपूर्ण समर्थन को जाहिर करती हूं। मैं भारतीय सशस्त्र बलों के साथ-साथ शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करती हूं।’

फ्रांस व भारत की मित्रता परस्पर

कुछ दिन पहले दाेनों देश के विदेश मं​त्रियों ने समसामयिक और राजनीतिक महत्व के मुद्दों और कोविड-19 से संबंधित चुनौतियों के समाधान पर भी चर्चा की। इससे पहले सोमवार को, विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और फ्रांसीसी विदेश सचिव फ्रांस्वा डेल्ट्रे के दोनों देशों के बीच सहयोग, वैश्विक मुद्दों पर विचारों के साथ कोरोना वायरस महामारी पर चर्चा की थी। इस दौरान फ्रांस ने 2021-22 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भागीदारी का स्वागत किया था।

फ्रांस बीते कुछ वर्षों से भारत का हर क्षेत्र में करीबी सहयोग करता आया है – चाहे रक्षा का मामला हो या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में आतंकी मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी की लिस्ट में डालने का प्रस्ताव। वहीं, दूसरी ओर भारत का फ्रांस के साथ की गई अत्याधुनिक राफेल्स डील ऐतिहासिक है। बताते चलें कि पीएम मोदी आखिरी बार 2019 में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के साथ निमंत्रण पर जी 7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस गए थे और इस दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-फ्रांस के संयुक्त सामरिक सहयोग पर बयान जारी किया गया था।

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