यूएन में भारत बोला- करतारपुर साहिब गुरुद्वारा का प्रबंधन हस्तांतरित करना यूएनजीए प्रस्ताव का उल्लंघन

नयी दिल्ली : भारत ने पाकिस्तान द्वारा पवित्र करतारपुर साहिब गुरुद्वारे का प्रबंधन मनमाने तरीके से गैर सिख इकाई को हस्तांरित करने का विरोध करते हुए कहा कि इस्लामाबाद का यह कदम सिख धर्म, उसके संरक्षण और रक्षा के खिलाफ होने के साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव का उल्लंघन है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंक और धर्म को लेकर अपना मौजूदा रवैया बदले तो दक्षिण एशिया में शांति बहाल करने की कोशिश की जा सकती है। ‘कल्चर ऑफ पीस’ पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव आशीष शर्मा ने कहा नवंबर में पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन का कामकाज पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से लेकर ‘एवेक्वी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड’ के प्रशासनिक नियंत्रण में कर दिया था, जो कि गैर सिख इकाई है। शर्मा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में बुधवार को कहा, ‘‘पाकिस्तान पहले ही पिछले साल इस सभा द्वारा पारित ‘कल्चर ऑफ पीस’ के शुरुआती प्रस्तावों का उल्लंघन कर चुका है। पिछले महीने पाकिस्तान ने मनमाने तरीके सिखों से पवित्र तीर्थस्थल करतारपुर साहिब गुरुद्वारा का प्रबंधन सिख समुदाय से लेकर गैर सिख इकाई के नियंत्रण वाले प्रशासन को सौंप दिया।’’
पाक का फैसनला सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ
शर्मा ने कहा कि यह कृत्य सिख धर्म, इसके संरक्षण और रक्षा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि करतारपुर साहिब गुरुद्वारा का जिक्र दिसंबर 2019 के महासभा के प्रस्ताव में है और पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव का उल्लंघन किया। यूएनजीए ने ‘शांति के लिए अंतरधार्मिक और अंतरसंस्कृति के प्रचार, समझ और सहयोग’ के प्रस्ताव को पिछले साल दिसंबर में अंगीकार किया था। इसमें करतापुर साहिब गलियारे को खोले जाने की पहल का स्वागत किया गया था। भारत ने पिछले महीने पाकिस्तान के संबंधित फैसले को ‘बेहद निंदनीय’ करार देते हुए कहा था कि यह सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। मालूम हो कि हाल ही में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा के प्रबंधन और रखरखाव का जिम्मा पाकिस्तान ने गैर सिख संस्था को दे दिया था। इसको लेकर भारत ने कड़ी आपत्ति भी जताई थी।
आतंक और नफरत की संस्कृति छोड़े पाक
शर्मा ने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान भारत में अलग-अलग धर्म के लोगों के खिलाफ अपनी मौजूदा नफरत की संस्कृति और सीमा पार से आतंक का समर्थन बंद करे तो हम दक्षिण एशिया में शांति की संस्कृति बहाल करने की पहल कर सकते हैं। यूएन में शर्मा ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले साल शांति कायम करने के लिए सभा में पेश किए गए प्रस्ताव का उल्लंघन पाकिस्तान पहले ही कर चुका है। आखिर कबतक हम लोग पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हत्या, जबरन धर्म परिवर्तन और उनपर हो रहे अत्याचार के मूक दर्शक बने रहेंगे? हालात ये हैं कि पाकिस्तान में हो रही सांप्रदायिक हत्याओं के चलते समान धर्म के लोगों की भी जान जा रही है।

 

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