चीन-बांग्लादेश की चौखट तक बिछेगा भारत के रोड नेटवर्क का जाल, ड्रोन करेगा सवेक्षण

– ड्रोन से जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा आदि राज्यों में हवाई सवेक्षण होगा आसान

भारत जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों में चीन और बांग्लादेश बार्डर तक रोड नेटवर्क का जाल बिछाने की दिशा में काम कर रहा है। बता दें कि इसके तहत हिमालय क्षेत्र की दुर्गम पहाड़ियों का हवाई सर्वेक्षण व डाटा संग्रह किया जाना आवश्यक है। अत: केंद्र सरकार अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, बड़े पुल-पुलिया, सड़कें आदि का थ्रीडी वीडियो, चित्र व लिखित विवरण एक डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध होगा। इस तकनीक से न केवल पैसे बल्कि समय की भी बचत होगी और निर्माण की एरियल निगरानी करने में भी सहुलियत होगी। सड़क निर्माण से पूर्व फिजिबलिटी रिपोर्ट, डीपीआर कई गुना तेज गति से बनेगी। वहीं, चालू परियोजनाओं की निगरानी करना आसान होगा।

ऐरियल फुटेज से होगा लाभ

सरकारी सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (एनएएआईडीसीएल) ने ड्रोन तकनीक से एरियल डाटा कलेक्शन व राजमार्ग परियोजना निगरानी तंत्र स्थापित करने के लिए रुचि के लिए अभिव्यक्ति (ईओआई) पिछले महीने जारी कर दिया है। अक्तूबर में एजेंसी नियुक्ति करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ड्रोन से जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, त्रिपुरा आदि राज्यों में हवाई सवेक्षण के जरिए ऐरियल डाटा संग्रह का काम शुरु किया जाएगा। वर्तमान में 2000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गो पर काम चल रहा है। इसकी निगरानी का काम भी ड्रोन के जरिए होगा।

क्या है योजना

सरकरी उपक्रम असम, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड, सिक्कम, पश्चिम बंगाल व अंडमान निकोबार में दो लेन, चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग, पुल, टनल आदि परियोजनाओं पर काम कर रहा है। ड्रोन तकनीक से एक दिन के नोटिस पर किसी भी क्षेत्र की किसी भी परियोजनओ की प्रगति का पता किया जा सकेगा।

निजी एजेंसी कंट्रोल व निगरानी तंत्र केंद्र (सीएमसी) की स्थापना करेगी। ड्रोन से हवाई सर्वेक्षण, फोटो (इमेज) व भूभाग का लिखित विवरण सीएमसी में सीधे भेजा जाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग, सड़क, पेड़, मोड़, गड्ढे, पुल, पुलिया, अतिक्रमण, कृषि भूमि, फार्म हाऊस, संरचनात्मक निरीक्षण, भूस्खलन क्षेत्र, भूभाग का क्षैतिज (वर्टिकल) व लंबरूप (होरिजेंटल) का विश्लेषण करना होगा। वीडियोग्राफी में पहाड़ी क्षेत्र का देशांतर-अक्षांश मानक का उल्लेख भी करना होगा। जिससे नए राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने में आने वाली अड़चनों को दूर किया जा सकेगा। यह तकनीक भूस्खलन, बाढ़, बारिश आदि से सड़कों टूट-फूट का पता लगाने व मरम्मत करने में मदद करेगी।

कैसे मिलेगा इससे भारत को लाभ

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन आक्रामक रूप से भारत की सीमा पर सैन्य व्यवस्‍था के लिहाज से बुनियादी ढ़ाचों की तेजी से निर्माण कर रहा है। वहीं दूसरी ओर, प्रधान मंत्री मोदी के अगुवाई में भारत चीन के साथ पूर्वी सीमा को सुरक्षित करने के लिए अपने फ्रंटियर राजमार्ग का निर्माण कर रहा है। बता दें कि भारत-चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो बहुत अधिक सैन्यीकृत है। वर्तमान में चीन के साथ जारी तनाव को देखते हुए यह फैसला भारत के पूर्वी क्षेत्रों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है।

यह रोड नेटवर्क न केवल इस से कनेक्टिविटी बढ़ेगी बल्कि माल, लोगों और विचारों के संचलन के अलावा, सीमाओं को सुरक्षित करने और राष्ट्र-राज्यों पर राजनीतिक वैधता को फिर से स्थापित करने की रणनीति के रूप में भी काम करेगा। इन सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए भौतिक और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का निर्माण करना अनिवार्य है।

 

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