भारत-अमेरिका 2+2 वार्ता : रक्षा व परमाणु पर हुए अहम समझौते, चीन को दिखाई आंख

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच आज कुछ ऐतिहासिक समझौते किए गए। मंगलवार को दोनों देशों के बीच 2 + 2 वार्ता हुई, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और अमेरिकी रक्षा सचिव मार्क एस्पर शामिल हुए। हैदराबाद हाउस में बैठक के लिए पहुंचे। बता दें कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत और चीन की सेना करीब पांच महिने से वास्तविक नियंत्रण रेखा के निकट तनावपूर्ण गतिरोध की स्थिति में है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने बयान में कहा कि भारत और अमेरिका की दोस्ती लगातार मजबूत हुई है, 2 + 2 बैठक में भी दोनों देशों ने कई मसलों पर मंथन किया जिसमें कोरोनाइस के बाद की स्थिति, दुनिया की मौजूदा स्थिति, सुरक्षा के मसलों पर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से बात की गई। दोनों देशों ने परमाणु सहयोग बढ़ाने को लेकर कदम बढ़ाए हैं, साथ ही भारतीय उपमहाद्वीप में सुरक्षा की स्थिति को लेकर विस्तार से बात की है। इस दौरान दोनों देशों के बीच अहम रक्षा समझौतेबुनियादी विनिमय और सहयोग समझौते (बीईसीए) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि बीईसीए समझौते से भारत की सैटेलाइट क्षमता और बढ़ेगी। इस समझौते के बाद दोनों देश भू-स्थानिक सूचनाएं और खुफिया जानकारियां साझा कर सकेंगे। साफ तौर से कहें तो भारत को मिसाइल हमले के लिए सटीक जानकारी मिल सकेगी।

चीन को घेरने की तैयारी, सुरक्षा-स्वतंत्रता के लिए खतरा

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा, आज दो महान लोकतंत्रों के और करीब आने का शानदार अवसर है। उन्होंने कहा, हमारे बीच कोरोना से निपटने से लेकर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से सुरक्षा और स्वतंत्रता के खतरे से निपटने, क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाने तक कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने आज नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

इन पाँचों मुद्दों पर हस्ताक्षर किए गए :

1. बुनियादी विनिमय और सहयोग समझौता (बीईसीए)
2. पृथ्वी विज्ञान पर तकनीकी सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन
3. परमाणु सहयोग पर व्यवस्था का विस्तार
4. डाक सेवाओं पर समझौता
5. आयुर्वेद और कैंसर अनुसंधान में सहयोग पर समझौता

भारत को कैसे पहुंचेगा फायदा
बीईसीए भारत और अमेरिका के बीच हुए चार मूलभूत समझौतों में से अंतिम है। इससे दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक्स और सैन्य सहयोग बढ़ेगा। इनमें से पहला समझौता 2002 में हुआ था जो सैन्य सूचना की सुरक्षा से संबंधित था। दो अन्य समझौते 2016 और 2018 में हुए थे।

बीईसीए की वजह से :
– अब भारत अमेरिका के जियोस्पेशल मैप्स का इस्तेमाल कर सकेगा जिससे ऑटोमेटेड हार्डवेयर सिस्टम्स और क्रूज-बैलिस्टिक मिसाइलों सहित हथियारों की सटीकता बढ़ जाएगी।
– यह भारत द्वारा अमेरिका से हथियारों से लैस मानव रहित विमानों (यूएवी) की खरीद के लिए भी अहम होगा।
– बता दें कि अमेरिका और भारत के बीच पहले भी खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान हो चुका है। 2017 में डोकलाम में चीन के साथ तनातनी के दौरान अमेरिका ने कथित तौर पर भारतीय सेना को चीनी सैनिकों के मूवमेंट की खुफिया जानकारी मुहैया कराई थी।

भारत ने इन मुद्दों पर की चर्चा

– दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत-अमेरिका के बीच 2 + 2 मंत्रिस्तरीय संवाद चल रहा है।
– 2 + 2 संवाद के दौरान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हमें खुशी है कि हमने बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट (बीईसीए) पूरा कर लिया है, जिससे सूचना साझाकरण में नए रास्ते खुलेंगे। हम अमेरिका के साथ आगे के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं।’
– ‘हमारी अर्थव्यवस्थाओं को नुकसान हुआ है। हम उद्योगों और सेवा क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारी साझेदारी वर्तमान चुनौतियों के मद्देनजर और महत्वपूर्ण हो जाती है। हम दोनों नियम-आधारित आदेश और लोकतंत्र में विश्वास करते हैं।’
– विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ‘पिछले दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय संबंध लगातार बढ़े हैं। ऐसे समय में जब नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है… एक साथ क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए हम बदलाव को वास्तविकता में बदल सकते हैं।’

अमेरिका ने इन मुद्दों पर की चर्चा

– अमेरिकी रक्षा सचिव मार्क कहा, ‘हमने विशेष रूप से पिछले वर्ष के दौरान अपनी रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत किया है जिसके दौरान हमने अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और सूचना साझाकरण को उन्नत किया है। हमारा सहयोग एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के दिन और सिद्धांतों की चुनौतियों को पूरा करता है।’
– अमेरिकी विदेश मंत्री माइकल पोम्पेओ ने कहा, ‘आज दो महान लोकतंत्रों के करीब बढ़ने का शानदार अवसर है। इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए खतरों का सामना करने के लिए, आज हम चर्चा करने के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं।’

दो वर्षों में यह तीसरी बैठक

वहीं, इस बैठक से पहले अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने लिखा, दो साल में यह तीसरी बैठक दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का संकेत है। मंत्रालय ने लिखा, पोम्पियो ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के आगामी कार्यकाल का स्वागत किया। इसके साथ ही अमेरिका और भारत के लिए पारस्परिक और वैश्विक चिंता के मुद्दों पर एक साथ मिलकर काम करने की बात कही।

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