पत्नी खाती है तंबाकू…पति पहुंचा अदालत

नागपुर : बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने तलाक के मामले में एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा है कि पत्नी की तंबाकू या खर्रा चबाने की आदत भले ही खराब हो, लेकिन यह कारण उसके पति को तलाक देने के लिए पर्याप्त नहीं है। यह कहते हुए बेंच ने 21 जनवरी, 2015 को नागपुर फैमिली कोर्ट के दिए गए फैसले को भी खारिज कर दिया।

न्यायमूर्ति अतुल चंदुरकर और पुष्पा गनेदीवाला की खंडपीठ ने कहा कि पति के आरोप सामान्य हैं। बेंच ने कहा, ‘यह विशिष्ट आरोप है कि चूंकि पत्नी को तंबाकू चबाने की आदत थी, इसलिए उसे पत्नी के इलाज में बहुत अधिक धन खर्च करना पड़ा। हालांकि, वह इस दलील के समर्थन में मेडिकल दस्तावेज और बिल के रेकॉर्ड पेश नहीं कर सके।’
कोर्ट ने कहा वजनदार नहीं हैं पति की दलीलें
फैमिली कोर्ट का हवाला देते हुए, पीठ ने कहा कि विवाह को भंग करने के लिए पति की दलीलें इतनी गंभीर और वजनदार नहीं हैं। उन्होंने कहा, ‘अगर विवाह को शून्य कर दिया जाता है, तो उनके बेटे और बेटी को एक बड़ा नुकसान होगा और उनकी परवरिश प्रभावित होगी। दोनों बच्चों के सर्वोत्तम हित में, वैवाहिक बंधन को बरकरार रखना जरूरी है।’
पति ने इलाज करवाने का किया दावा, पर नहीं दे सका दस्तावेज
15 जून 2003 को दंपती की शादी हुई थी। दोनों के बीच कुछ दिनों के बाद विवाद होने लगा। पति ने क्रूरता के आधार पर पारिवारिक अदालत में तलाक का मामला दायर किया। पति के तलाक का आधार प्रमुख रूप से पत्नी की तंबाकू या खर्रा चबाने की आदत थी। पति के अनुसार, वह तंबाकू चबाने की आदी थीं और इसलिए उनके पेट में एक गांठ हो गई। पत्नी के इलाज के लिए उसे बहुत धन खर्च उठाना पड़ा। उसने यह भी दावा किया कि वह कोई घरेलू काम नहीं करती थी और अकसर उसके घरवालों के साथ झगड़ा करती थी। पति ने यह भी आरोप लगाया था कि पत्नी बिना बताए अपने मायके चली जाती थी।

 

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