खा-पीकार करें कोरोना से लड़ाई ताकि हाथ न लगानी पड़े दवाई, जानें कैसे बढ़ाएं इम्यूनिटी

कोलकाताः मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन से कोरोना को दूर रखा जा सकता है। अच्छी बात यह है कि कोरोना की वैक्सीन भी लगाई जा रही है जो इम्यूनिटी दे रही है। अगले महीने 1 तारीख से 18 साल से ऊपर की उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन लगनी शुरू हो जाएगी तो ज्यादा आबादी में इम्यूनिटी होगी। फिलहाल सबसे जरूरी है अपने खानपान को संभालना। अगर हम हमेशा हेल्दी डाइट लेते हैं तो किसी भी बीमारी से मुकाबला कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स से जानकारी लेकर इसी बारे में बता रहे हैं।

हमारे खानपान से तैयार होने वाली इम्यूनिटी ऐसा हथियार है जिसकी वजह से शरीर के लिए वायरस से मुकाबला करना आसान हो जाता है। यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि आज बीमारी है या कोरोना है तो हेल्दी खाना खाते ही इम्यूनिटी आ जाएगी। यह एक हमेशा चलने वाला सिलसिला है। वैसे तो किसी के जन्म से पहले ही उसकी इम्यूनिटी बनने लगती है। इसे जेनेटिक या मेटरनल इम्यूनिटी कहते हैं। बच्चे को मां के दूध से इम्यूनिटी मिलती है। इसके बाद सही खानपान से भी हमें इम्यूनिटी मिलती है। वैसे तो हमें उम्र के मुताबिक सभी विटामिन और मिनरल्स भरपूर लेने चाहिए, पर एक्सपर्ट मानते हैं कि कोरोना से बचाव, इलाज या बाद में रिकवरी के मामले में 3 चीजों की अहम भूमिका है। ये हैं विटामिन-सी, विटामिन-डी और जिंक।

काढ़ा: सही तरीका, सही मात्रा
इन दिनों लोग बाजार में मिल रहे काढ़े का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। टी-बैग की तरह मिलने वाले काढ़े के पाउच के अलावा तैयार काढ़ा पाउडर भी मिल रहा है। खांसी-जुकाम होने पर ज्यादातर लोग काढ़ा पीकर राहत महसूस करते हैं। काढ़े का मतलब सिर्फ हल्दी, अदरक, दालचीनी, काली मिर्च, मुलेठी आदि सबको पानी में मिलाकर उबालना नहीं होता। काढ़ा किसी भी चीज का हो सकती है। यह दवा नहीं है बल्कि यह प्रोसेस है। लेकिन गर्मियों में ज्यादा काढ़ा नहीं लेना चाहिए। जिन्हें पित्त (पाचन से जुड़ी) की परेशानी हो, वे इस बात पर जरूर ध्यान दें।
काढ़ा पीने से फायदा-
गले में खराश कम होना, खांसी में कमी आना- सही तरीके से बने काढ़े से इम्यूनिटी बढ़ना- शरीर के अंदर गर्माहट महसूस होना- मोटापा घटता है क्योंकि शरीर की चर्बी पिघलती है।
किसे नहीं पीना- जिसे पेट में अल्सर हो- किडनी की समस्या हो- पाइल्स हो- 5 बरस से कम उम्र के बच्चों को
अगर काढ़ा तैयार कर रहे हैं…अदरक, सौंठ, लौंग, काली मिर्च कम से कम डालें। काढ़ा दूध में बनाया जाए तो इसकी तासीर ज्यादा गर्म नहीं रहती। अगर काढ़ा पीने से कोई परेशानी हो तो किसी वैद्य की सलाह लें।
मीठा काढ़ा ऐसे बनाएं
पानी: 60 से 70 एमएल (1 कप)दूध: 60 से 70 एमएल (1 कप)तुलसी के पत्ते: 3लौंग: 1काली मिर्च: 1दालचीनी: एक चुटकी पाउडर या आधा इंच दालचीनी का टुकड़ा
चीनी या शक्कर: स्वाद के अनुसार, अगर डायबीटीज है तो मीठा न लें या वैद्य की सलाह से लें।
– अगर लौंग, दालचीनी और काली मिर्च ले रहे हैं तो मुलेठी न लें या बहुत कम कर दें।

सात रंग का खाना खाएं
इस वक्त डाइट और स्वाद दोनों का ख्याल रखें। यह जरूरी नहीं है कि हेल्दी खाना बेस्वाद हो। लेकिन जिन चीजों को काढ़े में इस्तेमाल कर रहे हैं, उनको दूसरी चीजों में बार-बार न लें। अगर हल्दी सब्जियों में डाल रहे हैं और साथ में दो बार हल्दी वाला दूध भी ले रहे हैं तो हल्दी को बार-बार काढ़े में न डालें।
रंगारंग खाना
हरा रंग: पत्ते वाली और बाकी हरी सब्जियां लौकी, तौरी, कद्दू, ब्रोकली, साग पालक, पत्ता गोभी, अमरूद आदि।
ये सूजन घटाने में मदद करती हैं। इसलिए हरी सब्जियां जरूर खानी चाहिए।
पीला और संतरी रंग: केला, संतरा, नींबू, पपीता, बेल, गाजर आदि।
नीला और बैंगनी रंग: बैंगन, चुकंदर, पत्ता गोभी बैंगनी, बैंगनी रंग के अंगूर, जामुन, फालसे, अनार।
गहरा लाल: शकरकंदी, टमाटर।
सफेद और भूरा: प्याज, मूली, लहसुन, गोभी, शलगम।
ये सभी रंगों की चीजें पोषक तत्वों से युक्त हैं।
6 स्वाद चखें
खाने में ये सभी स्वाद शामिल करें:
1. मीठा – केला, शहद, खजूर, गाजर, नारियल, घी, दूध, मुलेठी, फालसा
2. खट्टे – इमली, नीबू, अनार, दही, कांजी
3. नमकीन – अचार, सेंधा नमक, समुद्री नमक, काला नमक
4. चरपरा – लहसुन, प्याज, मूली, अदरक, सोंठ, हींग, पिप्पली
5.कड़वा- करेला, नीम, गिलोय, हल्दी,पालक
6. कसैला – कमल ककड़ी, दालें
कोरोना मरीज की रुटीन
कोरोना को झेल रहे और इससे उबर रहे लोग वाकई सलाम के हकदार हैं। जिन लोगों में कोरोना ने अपना इंफेक्शन फैलाया है, उनमें न सिर्फ कमजोरी पैदा होती है बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी बुरी तरह थका देता है। इसलिए जब तक कोरोना की वजह से बुखार हो या फिर बुखार ठीक हो जाए लेकिन कमजोरी ज्यादा हो तो अपना खानपान दुरुस्त रखना बहुत ज्यादा जरूरी है।
– सुबह 7 से 8 घंटे की नींद के बाद 6 बजे तक उठना

– एक गिलास गुनगुने पानी में आधे नीबू का रस निकालकर पिएं, अगर किसी शुगर या बीपी की परेशानी है तो चीनी या नमक से दूरी बनाकर रही रखें, इससे शरीर डिटॉक्स होगा। यहां इस बात का ध्यान रखें कि शरीर में पानी की मात्रा किसी भी हाल में कम न हो। इसलिए हर दिन 7 से 8 गिलास पानी जरूर पिएं। यह पानी सामान्य या गुनगुना हो सकता है। अगर कोई चाहे तो 2 लीटर पानी में 1 नींबू काटकर डाल सकता है फिर उसी पानी को दिनभर पीते रहो। इससे पानी की कमी नहीं होगी और विटामिन-सी भी मिलता रहेगा।
या- हर्बल टी (एक टुकड़ा कुचला हुआ अदरक, 2 से 3 तुलसी के पत्ते बारीक तोड़े हुए और 1 चम्मच शहद के साथ)। इसके साथ ही हर दिन 1 अखरोट। जिंक के लिए अखरोट बहुत ही अच्छा जरिया है।
– आधे घंटे तक हल्की-फुल्की कसरत जैसे कमरे या बालकनी या छत पर तेज रफ्तार से टहलना, हाथ-पैरों को मोड़ना आदि।सुबह 8 से 9 के बीच (ब्रेकफस्ट)इसमें कई तरह के ऑप्शन हैं।
1. 1 गिलास इलायची मिल्क या 1 गिलास लस्सी और 1 कटोरी दलिया
2. बेसन का चीला के साथ धनिया पत्ते की हरी चटनी
3. 1 या 2 अंडे का एग रॉल और टमाटर की चटनी (टमाटर विटामिन-सी का भी अच्छा सोर्स है।)
4. आटे वाली ब्रेड और दूध। इसके बाद 2 घंटे तक आराम करना।
सुबह 11 से 12 के बीच- ग्रीन टी या मॉर्निंग टी या 1 गिलास नींबू पानी या काढ़ा पीना- 1 मौसमी फल जैसे: अन्ननास, कीवी, संतरा जैसे फल खानाऔर हर दिन 1 आंवला, 4 से 5 खजूर, 1 चम्मच च्यवनप्राश आदि इम्यूनिटी बढ़ाने वाली चीजें जरूर खाएं।दोपहर 1 से 2 बजे के बीच (लंच)
– लंच से पहले एक बार स्टीम जरूर कर लें।
– वेज पुलाव या बिरयानी या- खिचड़ी (इसमें चावल, दाल के अलावा पालक, लौकी, टमाटर भी हो, मिर्च का इस्तेमाल न करें तो बेहतर)या- 1 से 2 रोटी, 1 कटोरी चना दाल या मूंग दाल और 1 कटोरी मौसमी हरी सब्जी जिसमें तेल और मसाले का इस्तेमाल कम किया गया हो। और 1 प्लेट सलाद (गाजर, खीरा, टमाटर, नीबू) अगर नमक की जरूरत महसूस हो तभी लें। नहीं तो बिना नमक के भी सलाद खा सकते हैं।
शाम 4 से 5 बजे के बीच (स्नैक्स) लस्सी या छाछ या चना सत्तू ड्रिंक (नमकीन या मीठा)
1 कटोरी रोस्टेड मखाने पोहा कोई मौसमी फल या केला
रात 7 से 8 बजे के बीच (डिनर)- पालक या वेज या टमाटर का सूप- 1 कटोरी चावल या 1 से 2 रोटी या 1 उपमा या 2 इडली- 1 कटोरी दाल 8:30 बजे भाप लेना
रात 9 से 10 बजे के बीच- 1 गिलास गुनगुने दूध में 1 छोटा चम्मच हल्दी डालकर पिएं।
– जिन लोगों को दूध हजम करने में परेशानी हो, वे अजवायन के आधा चम्मच दाने पानी में उबालें और उस पानी को गुनगुना ही पी लें।
– रात 10 बजे नमक मिले हुए गुनगुने पानी से गरारे करने के बाद सो जाएं।शुगर और बीपी पेशंट के लिए हिदायतें
ऐसे लोग जिन्हें शुगर और बीपी की परेशानी है। उनके लिए कोरोना के बाद स्थिति कुछ ज्यादा ही चुनौतीपूर्ण हो जाती है। लेकिन थोड़ी सावधानी और सब्र के साथ इसका मुकाबला करना आसान हो सकता है। कोरोना में भूख कम लगने की परेशानी होती है। खाने में रुचि कम होने की शिकायत आम है। ऐेसे में यह जरूरी है कि खाने में मरीज की पहले दिलचस्पी पैदा हो। इसलिए जरूरी है…
– कम मात्रा में ही सही उसकी पसंदीदा चीज बने
– आसानी से पचने वाली चीजें ही खाने के लिए दें
– रोटी या चपाती वाली चीजों से दूरी बना सकते हैं। इसकी जगह चावल या खिचड़ी आदि दे सकते हैं।
– ध्यान रखें कि पेट खाली नहीं रखना है। इससे शुगर कम या बहुत ज्यादा हो सकती है।
किडनी मरीजों के लिए सावधानी
कोरोना होने के बाद शरीर के बेहतर काम करने के लिए यह जरूरी है कि लिक्विड की कमी न हो। इसका मतलब कई लोग यह लगा लेते हैं कि तय से ज्यादा पानी पीना। मसलन, एक आम इंसान को एक दिन में 7 से 8 गिलास पानी चाहिए तो वह 12 से 14 गिलास पानी पीने लगता है। यह पूरी तरह गलत है। पानी ज्यादा नहीं पीना है, लेकिन पानी या लिक्विड की मात्रा को कम भी नहीं करना। यही स्थिति कमोबेश किडनी मरीजों के लिए होती है। ऐसे मरीज जो डायलिसिस पर हैं या फिर बिना डायलिसिस वाले, जिन्हें उनके डॉक्टर ने हर दिन की लिक्विड की मात्रा तय कर दी है। इससे न कम लिक्विड लेना है और न ज्यादा।

 

 

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