इंटरनेट ने बदला क्राइम का तरीका, पढ़ें आंकड़ों में कौन सा राज्य है सबसे खतरे में

नई दिल्ली : आज के समय में इंटरनेट लोगों के लिए बहुत जरूरी हो गया है। इंटरनेट के बिना हमारा जीवन अधूरा है तो यह कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा। इंटरनेट ने हमारे सभी कार्यों को सरल बना दिया है। जिन कामों को करने के बारे में कभी सोचना भी नामुमकिन लगता था वहीं काम आज के समय में इंटरनेट की मदद से बेहद सरलता से हो जाते हैं। इंटरनेट ने जीवन को जितना सुविधाजनक बनाया है तो उनका मुश्किल भी बनाया है। क्राइम की गतिविधियों में लिप्त रहने वाले लोगों ने इसका इस्तेमाल क्राइम में करना शुरू कर दिया है। इंटरनेट का इस्तेमाल कर लोगों ने हजारों क्राइम किए हैं और ऐसे कई मामले में दर्ज भी हुए हैं। साइबर क्राइम से इतना ज्यादा अपराध बढ़ गया है कि अब देश के संसद में भी इस पर चर्चा की जा रही है। बजट सेशन के वक्त एक एमपी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन मिनिस्ट्री से मोबाइल और इंटरनेट के गलत इस्तेमाल के बारे में प्रश्न पूछा था कि फोन और इंटरनेट के इस्तेमाल से हिंसा भड़काने के कितने केस हुए हैं। इसकी जानकारी मंत्रालय की ओर से दी गई। मंत्रालय की ओर से मिली जानकारी में ऐसे मामलों को साइबर क्राइम में माना गया है। इसलिए इन सभी की जानकारी साइबर क्राइम के तहत दी गई है। सरकार द्वारा संसद में दिए गए उत्तर में कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के डाटा के मुताबिक वर्ष 2017 में 21796 मामले आए, वर्ष 2018 में 27248 मामले आए और वर्ष 2019 में 44546 मामले सामने आए हैं। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि साल दर साल साइबर क्राइम में इजाफा होता जा रहा है। वर्ष 2018 से 2019 के दौरान केस डेढ़ गुना बढ़े हैं। फिलहाल 2020 का डाटा नहीं आया है, जिससे यह साफ नहीं हुआ है कि अपना क्राइम में कितना इजाफा हुआ है। माना जा रहा है कि इस दौरान क्राइम का डाटा और भी ज्यादा बढ़ सकता है। मंत्रालय से मिली जानकारी में यह साफ नहीं हुआ है कि इंटरनेट पर मिली जानकारी के चलते हिंसा भड़काने के कितने मामले सामने आए हैं। इसमें मंत्रालय द्वारा एक मिली जुली रिपोर्ट आई है।
अगर राज्य के हिसाब से साइबर क्राइम की तुलना की जाए तो इसमें पहले पायदान पर उत्तर प्रदेश है। इस दौरान यूपी में वर्ष 2017 में 4971 मामले सामने आए। इस दौरान 2726 केस में गिरफ्तार भी किया गया है। साल 2018 में यूपी में 6280 केस दर्ज हुए। वहीं साल 2019 की बात करें तो इस दौरान 11416 केस दर्ज हुए। देश की सरकार इनसे निपटने के लिए कई कदम उठा रही है। सरकार ने इनके लिए साइबर पुलिस स्टेशन, सूचना प्रौद्यिगिकी अधिनियम 2000 में साइबर क्राइम को खत्म करने के लिए कई प्रावाधान जोड़े हैं।
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