चंद्रयान-2 से आई पहली तस्वीर, ट्वीट कर इसरो ने की साझा

Moon's surface

नई दिल्ली : अपने ट्वीटर अकाउंट पर चंद्रयान-2 से आई पहली तस्वीर साझा करते हुए इसरो ने बताया कि चंद्रयान-2 ने चांद की जगमगाती सतह की तस्वीर कैद की है। यह तस्वीर इमेजिंग इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर (आईआईआरएस) पेलोड द्वारा खींची गई है। चंद्रयान के विक्रम लैंडर ने चांद की सतह से 2,650 किलोमीटर की ऊंचाई से यह तस्वीर ली है। इसरो ने खुद इस तस्वीर को अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है।

चांद की उत्पत्ति और विकास को समझना है मिशन का उद्देश्य

इस मिशन के तहत पेलोड द्वारा चंद्रमा की उत्पत्ति और विकास को समझा जाएगा। इसके लिए पेलोड चंद्रमा की सतह को स्कैन करके सतह की खनिज संरचना की मैपिंग करेगा। साथ ही यह परिलक्षित सौर स्पेक्ट्रम में हस्ताक्षर का उपयोग कर उपकरण सामग्रियों को निर्धारित करने में सक्षम होगा। चंद्रयान-2 चंद्र की परिक्रमा कर रहा है। इसरो ने कहा कि उसने चांद की सतह पर स्पेक्ट्रोस्कोपिक अध्ययन शुरू कर दिया है। इसरो ने ट्विटर पर तस्वीर शेयर की और कहा कि संकीर्ण और सन्निहित स्पेक्ट्रल चैनलों में चंद्रमा की सतह से परावर्तित सूर्य के प्रकाश को मापने के लिए आईआईआरएस को तैयार किया गया है। अपलोड की हुई तस्वीर चांद के उत्तरी गोलार्द्ध की है जो सोमरफील्ड, किर्कवुड और स्टेबिन्स सहित कई क्रेटर दिखाती है। इसरो ने यह भी कहा कि प्राथमिक विश्लेषण के बाद यह स्थापित किया गया था कि आईआईआरएस प्रतिबिंबित सौर विकिरण में भिन्नता को मापने में सक्षम होगा, जो विभिन्न प्रकार के सतह प्रकारों से चंद्र सतह को उछाल देता है।

टूट गया था लैंडर से इसरो का संपर्क

बता दें कि 22 जुलाई को चंद्रयान-2 मिशन की शरुआत की गई थी। 14 अगस्त को लैंडर विक्रम और रोवर भारत की कक्षा से बाहर निकल गए। छह दिनों के बाद चंद्रयान-2 ने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया था और 2 सितंबर को लैंडर विक्रम सफलतापूर्वक आर्बिटर से अलग हो गया। तय मिशन के मुताबिक लैंडर को मध्यरात्रि में 1 से 2 बजे के बीच लैंड करना था लेकिन इसके पहले ही इसरो से लैंडर का संपर्क टूट गया था। गौरतलब है कि चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को लेकर अब तक इसरो को कुछ बड़ी सफलता हाथ नहीं लगी है और न ही अब तक विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित हो पाया है। इसके पूर्व अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने जानकारी दी थी कि उसका एलआरओ 17 सितंबर को विक्रम की लैंडिंग साइट से गुजरा था और उस क्षेत्र की हाई-रिजोल्यूशन तस्वीरें मिली थीं। हालांकि लूनर रिकनैसेंस ऑर्बिटर कैमरा (एलआरओसी) की टीम को लैंडर की स्थिति या तस्वीर नहीं मिल सकी थी।

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