मलबे में दबे इंसानों की चीख सुनकर उनकी लोकेशन बताएगा यह ड्रोन

नई दिल्ली : इंजीनियर्स ने एक ऐसा ड्रोन बनाया है जो आपदा के समय बहुत काम आएगा। भूकंप में गिरी इमारतों, मलबों में दबे इंसानों की चीख सुनकर उनकी मौजूदगी को पुख्ता करेगा। यह ड्रोन इतना ज्यादा सेंसिटिव है कि अपने छह रोटर (पंखों) की तेज आवाज के बावजूद यह इंसान की चीख सुन लेगा। इस ड्रोन में अत्याधुनिक एकॉस्टिक सॉफ्टवेयर और माइक्रोफोन लगा है। हाल ही में इसका परीक्षण किया गया जिसमें लकड़ियों के मलबे के नीचे दबे इंसान की आवाज को इसने सुन लिया और उसकी सही लोकेशन भी बता दी। जर्मन रिसर्च इंस्टीट्यूट फ्रॉनहोफर FKIE ने इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है। इसके साथ डिपार्टमेंट ऑफ सेंसर डेटा एंड इन्फॉर्मेशन फ्यूजन ने भी काम किया है। इस ड्रोन को बनाने वाली इंजीनियर्स ने हाल ही में एकॉस्टिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका के सामने इसका प्रदर्शन करके दिखाया। ड्रोन्स एक रोबोट होता है जो उड़कर आपदा के समय लोगों की मदद कर सकता है। कई बार भारी और ज्यादा मलबे के नीचे दबे इंसानों को बचावकर्मी या कुत्ते खोज नहीं पाते। लेकिन यह मलबे के ऊपर उड़कर मलबे के नीचे से आती महीन आवाज को भी पहचान लेता है। इसकी मदद से बचावकर्मी मलबे के नीचे दबे लोगों की सही लोकेशन हासिल करके उन्हें निकालने का प्रयास सही समय पर कर सकते हैं। इंजीनियर्स मैकारेना वारेला और वल्फ-डायटियर वर्थ ने बताया कि अक्सर लोग मलबे के नीचे से जोर से चीखते हैं। जिंदगी बचाने के लिए वो पूरी ताकत से आवाज निकालते हैं। लेकिन ज्यादा मलबा और गहराई होने की वजह से आवाज ऊपर तक नहीं आ पाती। हादसे वाली जगह पर बचावकर्मियों, मशीनों और अन्य यंत्रों की काफी ज्यादा आवाज भी होती है। जिसकी वजह से मलबे में दबे इंसान की आवाज दब जाती है। लेकिन यह ड्रोन उसी आवाज को पकड़ता है। मैकारेना ने बताया कि अगर ड्रोन पर सही एकॉस्टिक सॉफ्टवेयर और माइक्रोफोन लगाया जाए तो इंसानों को मलबे के अंदर खोजा जा सकता है। हमने एक ड्रोन बनाया है। उसने परीक्षण में सही परिणाम भी दिए हैं लेकिन हम अपने एकॉस्टिक सॉफ्टवेयर और सिस्टम को और सटीक बनाने की प्रक्रिया में लगे हैं। हम अपने ड्रोन में माइक्रोफोन ऐरे लगा रहे हैं। जो अलग-अलग तरह की चीख को पहचानने में सक्षम है। इस ड्रोन में लगा एकॉस्टिक सिस्टम आवाज को पहचान कर फिल्टर करके यह बताता है कि यह कितनी नीचे से आ रहा है। इंसान मलबे में किस तरफ दबा है। उसकी सही लोकेशन का पता चला जाता है। मैकारेना ने बताया कि उन्होंने हाल ही में अमेरिकी मीडिया संस्थानों के सामने इसका सफल परीक्षण करके दिखाया है। इस ड्रोन ने लकड़ियों के ढेर के नीचे दबे एक शोधकर्ता की चीख को पहचान कर उसकी सही लोकेशन और गहराई बता दी थी। वह भी कुछ सेकेंड्स के अंदर ही जानकारी मिलेगी।

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