क्या आप जानते हैं असली समोसे में आलू नहीं होते थे!

कोलकाताः यह गाना तो आपने जरूर सुना होगा ‘ जब तक रहेगा समोसे में आलू तेरा रहूंगा ओ मेरी शालू’… अब इस गाने से यह तो स्पष्ट हो गया है कि समोसे और आलू का रिश्ता बेहद पुराना और खास है, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी की पहले समोसे में आलू नहीं बल्कि कुछ और ही शामिल होते थे। आज के लेख में हम आपको बताएंगे की हर दिल अजीज समोसा, कहां से आया और कैसे हमारे यहां रच बस गया।
जब भी लगे भूख…
भारतीय व्यंजनों में समोसे को एक अलग ही महत्व दिया गया है। जब भी किसी को भूख लगती है और उसको बाहर का खाने का मन होता है तो उसके दिमाग में सबसे पहला ख्याल समोसे का ही आता है। छुट्टी हो या पिकनिक, मेहमान आए हों या दोस्त, समोसे के स्वाद के बिना कोई भी पार्टी पूरी नहीं होती। सभा हो या कोई बैठक चाय के साथ समोसा ही भाता है।
लेकिन क्या आपको इस बात की जानकारी है कि आखिर ये समोसा आया कहां से?
ईरान देश से जुड़ा हुआ है समोसे का इतिहास
कहा जाता है कि भारत में फ्राइड फूड का अहस हिस्सा बन चुका समोसा ईरान से यहां आया। ईरान से भारत आया समोसा, भारतीय स्वाद में घुल-मिल गया। रेहड़ी एवं फुटपाथ से लेकर बड़े-बड़े होटलों की दहलीज पर इतराने लगा। हर भारतीय घर के स्वाद में चटखारे मारने लगा। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक के दिल का अजीज पकवान बन गया।
‘संबोसाग’ से निकला हुआ शब्द है समोसा
कहते हैं कि फारसी भाषा के ‘संबोसाग’ से निकला हुआ शब्द है समोसा। कुछ इतिहासकारों की माने तो गजनवी साम्राज्य के शाही दरबार में एक ‘नमकीन पेस्ट्री’ परोसी जाती थी और इस पेस्ट्री को मीट कीमा और सुखा मेवा भरकर बनाया जाता था।इतिहासकारों के अनुसार भारत देश में 2000 साल पहले समोसा आया, जब आर्य भारत आए थे।
हर 100 किमी पर बदल जाती है समोसे की परत
जिस तरह से समोसे के अंदर का मसाला हर 100 किलोमीटर में बदल सकता है वैसे ही उसकी परत भी बदल जाती है। समोसे की परत कई जगह पतली होती है और कहीं बहुत मोटी। कराची में मिलने वाले पतली परत के समोसों को कागज़ी समोसा कहा जाता है।
खाने के जानकार मानते हैं कि दक्षिण भारत ने अपने लायक आलू की नयी डिश तैयार कर ली थी जिसे आलू बोंडा कहते हैं। जानकार कहते हैं कि हिन्दुस्तान में पिछले 500 सालों में कई नयी चीज़ें आएं। सभी हिन्दुस्तान की खाद्य संस्कृति का हिस्सा बन गई।

उत्तर प्रदेश में बना था आलू वाला समोसा
मान्यता है कि आलू वाला शाकाहारी समोसा सबसे पहले उत्तर प्रदेश में बनाया गया। यहां इसे इतना ज्यादा पसंद किया गया कि देखते ही देखते इसकी प्रसिद्धि बढ़ती चली गई और गली गली में पसंदीदा स्नैक्स के तौर पर बिकने लगा। समय के साथ मीट के समोसों का चलन लगभग खत्म सा हो गया और आलू का समोसा देश और विदेशों तक में प्रसिद्ध हो गया।

 

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