कोरोना कमबैक: पहले बुजुर्ग, फिर युवा और बच्चे, चौथी लहर में कौन !

नई दिल्ली  : देश में एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं। पिछले 10 दिन में कोरोना से संक्रमित होने वाले नए मामलों की संख्या की दर में रोजाना आधार पर 260 फीसदी का इजाफा हो गया है। बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए इस बात की आशंका बढ़ गई है कि क्या अब चौथी लहर दस्तक देने वाली है। पिछले दो हफ्ते में होम आइसोलेशन में मरीजों की संख्या में छह गुना बढ़ोतरी हुई है। बीतें 11 अप्रैल को होम आइसोलेशन में मरीजों की संख्या 447 थी जो 24 अप्रैल को बढ़कर 2,812 हो गई। यही नहीं, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इन सब संकेतों से साफ है कि एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर चौथी लहर आती है तो उसका शिकार कौन बन सकता है..

10 दिन में ऐसे बढ़े केस

स्वास्थ्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार 15 अप्रैल को जहां कोरोना से संक्रमिक होने वाले नए मरीजों की संख्या 949 थी। वह 26 अप्रैल की सुबह 8 बजे तक बढ़कर पिछले 24 घंटे में 2483 पहुंच गई है। यानी नए मरीजों की संक्रमित होने की संख्या की दर में 10 दिनों में 260 फीसदी का इजाफा हुआ है। साफ है कि अब हर रोज करीब 2500 नए केस सामने आ रहा हैं। अकेले दिल्ली की बात की जाय तो सोमवार को वहां पर दिल्ली में संक्रमण के 1,011 नए मामले सामने आए और महामारी से एक मरीज की मौत हो गई।

पहली तीन लहरों में इन पर असर

कोविड-19 की पहली लहर जब साल 2020 के मार्च में पहली लहर आई थी तो उस वक्त सबसे ज्यादा शिकार वरिष्ठ नागिरक या बुजुर्ग लोग हुए थे। जबकि दूसरी लहर अप्रैल-मई 2021 में आई थी। उस दौरान सबसे ज्यादा युवा लोगों पर असर हुआ था। इसमें 30-55 साल की उम्र लोगों पर असर हुआ था। इसके बाद दिसंबर-जनवरी (2021-22) में तीसरी लहर ने बच्चों को चपेट में लिया था। अब सवाल उठता है कि चौथी लहर अगर आई तो कौन लोग शिकार होंगे।
इन पर खतरा

वैसे तो चौथी लहर को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि हम कोविड-19 के डेल्टा वैरिएंट की तुलना में कोई ‘नई लहर’ नहीं देखेंगे। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्रीन टेंप्लेटन कॉलेज में रिसर्च फेलो डॉक्टर शाहिद जमील का कहना है अभी जो वायरस लोगों को संक्रमित कर रहा है वह मूल रूप से ओमिक्रान से बहुत ज्यादा अलग नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का XE वैरिएंट भी ओमिक्रान से ज्यादा गंभीर नहीं है।

लेकिन अगर वैक्सीनेशन के आधार पर सुरक्षा को देखा जाय तो देश में अब तक 187 करोड़ वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है। इसके अलावा अभी देश में 12 साल और उससे ऊपर की उम्र के लोगों को वैक्सीन लग रही है। यानी अभी भी 12 साल से कम उम्र के बच्चों के पास वैक्सीन की सुरक्षा नहीं है। ऐसे में मौजूदा दौर में उन पर सबसे ज्यादा खतरा है।

इसी तरह कोविड वैक्सीन में कोरोना से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता 6-7 महीने बाद घटने की आशंका है। इसीलिए अब प्रीकॉशन डोज यानी बूस्टर डोज भी लगाया जा रहा है। लेकिन 25 अप्रैल तक के आंकड़ों के अनुसार अभी 2.69 करोड़ प्रीकॉशन डोज लगाई गई है। ऐसे में नई लहर में ऐसे लोगों को भी कोरोना हो सकता है जिन्होंने प्रीकॉशन डोज समय पर नहीं ली है।

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