गर्व इतना कि देर तक रोए नहीं’: सबसे गमगीन विदाई की

यह देश की सबसे गमगीन विदाइयों में से एक है। गुरुवार शाम पालम एयरपोर्ट पर जैसे ही तिरंगे में लिपटी 13 पार्थिव देहों को विशेष विमान से एक-एक कर उतारा गया, हर उस देशवासी की आंखें नम हो गईं, जो टेलीविजन स्क्रीन पर इस मंजर को देख रहा था। इन पार्थिव देहों में एक शरीर देश के सर्वोच्च सेनापति जनरल बिपिन रावत का भी था। वही जनरल, जिन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने और म्यांमार में जाकर आतंकियों का सफाया करने जैसे सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई थी। वही जनरल रावत, जो चीन और पाकिस्तान की आंखों की किरकिरी रहे और थलसेना प्रमुख के बाद देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बने।तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर क्रैश में जान गंवाने वाले जनरल रावत, उनकी पत्नी मधुलिका, ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह समेत 13 लोगों के पार्थिव शरीर जब पालम एयरपोर्ट पहुंचे, तब उनके परिवार के सदस्यों ने मजबूत इरादों का परिचय दिया। उनकी आंखें नम जरूर थीं, लेकिन गर्व इतना था कि वे आम लोगों की तरह रोए नहीं। उनके कंधे झुके हुए नहीं थे। आखिर ये फौजियों के परिवार जो थे। इन्हें श्रद्धांजलि देने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, नौसेना प्रमुख आर हरि कुमार, वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल वीआर चौधरी भी पहुंचे। इस हादसे में सीडीएस रावत की पत्नी मधूलिका रावत का भी निधन हो गया। मधूलिका सेना में महिलाओं के हित से संबंधित एसोसिएशन (एडब्ल्यूडब्ल्यूए) की अध्यक्ष थीं। वायु सेना के अनुसार सीडीएस जनरल बिपिन रावत अपनी पत्नी के साथ वेलिंगटन में स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज का दौरा करने के लिए और वहां छात्रों व शिक्षकों को संबोधित करने जा रहे थे।

 

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