शाहीन बाग वालों को सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका

shaheen baagh

नई दिल्ली :  नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध के नाम पर करीब दो महीने से दिल्ली के शाहीन बाग में मनमानी कर रहे मुसलमानों और ​अन्य प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने शाहीन बाग में जारी प्रदर्शन के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सीधे तौर पर प्रदर्शनकारियों को हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया है, लेकिन दो टूक यह भी कह दिया कि न्यायालय ने सोमवार को कहा कि किसी भी सार्वजनिक रास्ते को अनंतकाल के लिए बंद नहीं किया जा सकता। लेकिन इस मामले में दूसरे पक्ष को सुनना भी जरूरी है। इसे लेकर न्यायालय की ओर से दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। साथ ही प्रदर्शन के दौरान 4 महीने के बच्चे की मौत को लेकर भी केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय की गई है। अब वहां से इन लोगों को हटाया जाना लगभग तय है। बता दें कि बीते करीब दो महीनों से दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हजारों की तादात में महिलाएं प्रदर्शन कर रहीं हैं जिससे वह रास्ता बंद है और वहां से आने-जाने वाले लोगों को दिक्कत हो रही है। मजेदार बात यह है कि एनआरसी न अभी लागू हुआ है और न ही सीएए से किसी भारतीय नागरिक, मुसलमानों सहित, को कोई खतरा है। फिर भी ये लोग वहां धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।

विदेशों से आ रहा पैसा

खास बात यह है कि धरने पर बैठे मुसलमानों और अन्य लोगों के लिए न केवल सुबह शाम खाने का प्रबंध है, बल्कि वहां बैठने वालों को 500 से 700 रुपये प्रतिदिन दिए जाने की चर्चा भी है। इस मामले में केरल के अतिवादी मुसलमान संगठन पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई पर आरोप है कि उसने 120 करोड़ रुपये जुटाए और दिल्ली से लेकर यूपी तक सीएए विरोध के नाम पर हिंसा भड़काने के लिए यह पैसा दिया गया। साथ ही, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं वकील कपिल सिब्बल को 70 लाख रुपये दिए गए। साथ ही, मानवाधिकारवादी वकील इंदिया जयसिंह व अन्य को भी पैसे ​दिए गए थे। हाल ही में खुलासा हुआ कि पीएफआई का दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस नेताओं के लगातार संपर्क में था। साथ ही, वह दलितों के स्वयंभू नेता भीम आर्मी के चंद्रशेखर रावण के खास लोगों में भी शामिल है।

शुक्रवार को टाल दी गई थी सुनवाई

उच्चतम न्यायालय में सोमवार को शाहीन बाग प्रदर्शन में मासूम और नाबालिगों की भागीदारी रोकने को लेकर भी सुनवाई की गई। इससे पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव के चलते याचिका की सुनवाई को टालते हुए शुक्रवार को जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ की खंडपीठ ने कहा था कि हम समझते हैं कि समस्या है लेकिन हमारे सामने सवाल यह है कि इसे हल कैसे किया जाए? पहले चीजों को सामने आने दीजिए।’

शाहीन बाग से सबसे ज्यादा मतदान होने की कही थी बात

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय में दिल्ली के शाहीन बाग में 13ए रोड बंद होने के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं। शुक्रवार को याचिकाकर्ता वकील अमित साहनी ने कहा था कि 8 फरवरी यानी शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान के चलते न्यायालय में सोमवार को याचिका पर सुनवाई की जाएगी। दूसरी ओर, शाहीन बाग में सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि इस चुनाव में पूरी दिल्ली में सबसे ज्यादा मतदान यहीं से होगा और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने वाले लाेग प्रदर्शन स्‍थल से आ-जा सकेंगे जिसके लिए ई-रिक्शा-ऑटो भी मौजूद रहेंगे।

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