कृषि बिलों के खिलाफ विधेयक पास, अमरिंदर सिंह बोले, ‘सरकार गिरने का डर नहीं’

चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि पंजाब के किसानों के प्रति किये जा रहे ‘अन्याय’ के आगे झुकने के बजाए वह इस्तीफा देने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि केंद्र द्वारा लागू किए गए नए कृषि कानूनों के कारण राज्य की शांति बाधित हो सकती है और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह हालात से परेशान और निराश हैं। वह कोविड-19 संकट के दौरान लिए गए केंद्र के फैसले को समझना चाहते हैं जो किसानों की परेशानी का सबब बना हुआ है।

किसानों को परेशान होता नहीं देख सकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान सिख लोकाचार पर हुए हमलों का समर्थन करने या उन्हें स्वीकार करने के बजाए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया था। उन्होंने कहा, ‘मैं इस्तीफा देने से नहीं डरता। सरकार के बर्खास्त होने से भी नहीं घबराता। लेकिन मैं किसानों को बरबाद होता या परेशान होता नहीं देख सकता।’ मुख्यमंत्री ने विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को अस्वीकार करने के लिए उनकी सरकार द्वारा सदन में लाए गए चार विधेयकों को पेश करते समय यह कहा। सिंह ने केंद्र को चेतावनी देते हुए कहा कि परिस्थितियां हाथ से निकल सकती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि कानून वापस नहीं लिए गए तो नाराज युवा किसानों के पक्ष में सड़कों पर उतर आएंगे।

कृषि बिलों को निष्प्रभावी करने वाले बिल में क्या कुछ है खास
– पंजाब राज्य में कहीं भी गेहूं और धान न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम पर नहीं खरीदा जा सकेगा, अगर कोई कंपनी कॉरपोरेट व्यापारी आदि ऐसा करते हैं तो उन्हें 3 साल का सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
– केंद्रीय कानून में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट में किसानों और कंपनियों के बीच विवाद होने पर केवल एसडीएम तक ही केस लड़े जाने का प्रावधान किया हुआ है, जबकि पंजाब सरकार ने अपने एक्ट में प्रावधान किया है कि सिविल कोर्ट में किसान जा सकेंगे।
– केंद्रीय कानून में कहा गया है कि खरीदी जाने वाली फसल के बारे में कोई भी लिमिट नहीं होगी और न ही यह कहां भंडारण की गई है इसके बारे में बताने की जरूरत है। इस प्रभाव को कम करने के लिए पंजाब सरकार ने अपने बिल में कहा है कि खरीदी जाने वाली फसल की सीमा राज्य सरकार द्वारा तय की जाएगी और इसे कहां स्टोर किया गया है यह भी बताना होगा इन बिलों पर बहस चल रही है।

पंजाब के मुख्यमंत्री ने केन्द्र के कृषि कानून के खिलाफ विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव

आज पंजाब विधानसभा में केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को पंजाब में निष्प्रभावी करने के लिए तीन प्रस्ताव पेश किए गए, जिसे विधानसभा ने सर्वसम्मति से पास कर दिया। प्रस्ताव में केन्द्र के प्रस्तावित बिजली (संशोधन) विधेयक 2020 को भी खारिज किया गया। सिंह ने सभी दलों से पंजाब को बचाने के लिए राजनीतिक हित से ऊपर उठने की अपील की।

सीएम अब राज्यपाल से मिलने जाएंगे। सदन के नेता मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि आपातकालीन सत्र में बिल लाने में देरी हुई। मुख्यमंत्री सरकारी प्रस्ताव पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस ले। वह इस संबंध में केंद्र को तीन पत्र भी लिख चुके हैं।

सिंह ने कहा कि उन्होंने विभिन्न विशेषज्ञों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद सुबह साढ़े नौ बजे ‘किसान विरोधी कानूनों’ के खिलाफ एक प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा, ‘मुझे काफी ताज्जुब है कि आखिर भारत सरकार करना क्या चाहती है।’ इसमें ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खाद्यान्नों की खरीद को किसानों का वैधानिक अधिकार बनाने के लिए एक नए अध्यादेश की घोषणा करने’ और ‘एफसीआई और अन्य ऐसी एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा खरीद’ जारी रखने की मांग की गई है।

कौन से हैं यह तीन विवादित बिल और ​अमरिंदर सिंह के काउन्टर बिल
1. कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020
2. कृषक (सशक्तीरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता
3. कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 विधेयक
– राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के इन्हें मंजूरी देने के बाद अब ये कानून बन चुके हैं।

सिंह द्वारा इनके खिलाफ पेश किए तीन विधेयक:
1. किसान उत्पादन व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विशेष प्रावधान एवं पंजाब संशोधन विधेयक 2020
2. आवश्यक वस्तु (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक 2020
3. किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा (विशेष प्रावधान और पंजाब संशोधन) विधेयक 2020
– सिंह ने कहा कि ये विधेयक भविष्य में राज्य की कानूनी लड़ाई का आधार बनेंगे।

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