अमेरिकी मीडिया ने अयोध्या फैसले को बताया मोदी की बड़ी जीत

celebrating

नई दिल्ली : अयोध्या मामले में शीर्ष न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट की स्‍थापना करने के लिए योजना तैयार करना होगा। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष यानी कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में कहीं और 5 अकड़ की जमीन देने को कहा है। अमेरिकी मीडिया ने शीर्ष न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि सालों से चलते आ रहे इस विवाद की समाप्ति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी जीत बताई है। प्रसिद्व अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि भारतीय जनता पार्टी का लक्ष्य अयोध्या की विवादित स्‍थल पर भगवान राम के लिए मंदिर का निर्माण कराना था। अखबार के मुताबिक न्यायालय के इस फैसले से राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया है। भारत की शीर्ष न्यायालय ने अयोध्या के विवादित धार्मिक स्‍थल पर केंद्र सरकार को ट्रस्ट स्‍थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। जिस जगह मस्जिद हुआ करती थी अब वहां मंदिर बनेगा।

134 साल का विवाद 30 मिनट में सुलझा

वाॅशिंगटन पाेस्ट के अलावा अन्य विदेशी मीडिया ने भी इस फैसले पर अपनी ‌टिप्पणी दी है। संयुक्त अरब अमीरात की वेबसाइट गल्फ न्यूज ने कहा कि भारत की शीर्ष न्यायालय ने 134 सालों से चलते आ रहे विवाद को 30 मिनट में ही सुलझा दिया। गल्फ न्यूज ने लिखा कि अब अयोध्या में हिंदूओं को जमीन मिलेगी और मुस्‍लिम पक्ष को 5 एकड़ की वैकल्पिक जमीन सौपी जाएगी। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने इसे भाजपा की विजय बताते हुए कहा है कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य राम मंदिर बनवाना ही था। यह उनकी राष्ट्रवादी एजेंडे का अहम हिस्सा था। अयोध्या मामले का फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत के 20 करोड़ मुसलमान सरकार के सामने असुरक्षित महसूस कर रहे थे। साल 1992 में मस्जिद का टूट जाना भारत में सेकुलरिज्म के विफल ‌होने का बड़ा क्षण था।

पाक के अखबार ने लिखा- फैसले से पड़ सकता है दोनों धर्मों पर असर

जहां एक ओर पाक के विदेश मंत्री महमूद कुरैशी ने अयोध्या मामले में शीर्ष न्यायालय की टाइमिंग को लेकर नाराजगी प्रकट की है तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी अखबार द डान ने लिखा है कि इस फैसले से भारत में हिंदू और मुस्लिमों के रिश्ते पर असर पड़ने के आसार है। अखबार में लिखा है कि भारत के न्यायालय ने उस विवादित स्‍थल पर मंदिर बनाने का निर्देश दिया है जहां हिंदुओं के समुह ने 1992 में मस्जिद गिराई थी। लेकिन न्यायालय ने यह मान लिया है कि बाबरी मस्जिद को गिराना नियमों का पालन न करना है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद गिराने के बाद मंदिर बनाने का प्लान बनाया। मंदिर बनाने की इजाजत उस जगह मिली है जहां पहले मस्जिद हुआ करती थी। मोदी और भारतीय जनता पार्टी हिंदू राष्ट्रवाद और अयोध्या में मंदिर बनाने के लक्ष्य से ही सत्ता में आए हैं और यही उनका मुख्य मुद्दा था।

शेयर करें

मुख्य समाचार

ममता की हुंकार : नहीं होने देंगे एनआरसी

सागरदिघी (मुर्शिदाबाद) : राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को लेकर राजनीतिक बहस बढ़ती ही जा रही है। बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हुंकार भरते हुए आगे पढ़ें »

डीआरआई का रेड और नोटों की बारिश

कोलकाता : महानगर के डलहौसी इलाके के बेन्टिक स्ट्रीट में बुधवार की दोपहर बाद अचानक एक कामर्शियल बिल्डिंग से नोटों की बारिश होने लगी। घटना आगे पढ़ें »

ऊपर