अखिलेश को भारी पड़ा ‘अतिउत्साह’, नियमों की उड़ाईं धज्जियां; अब हुआ एक्शन

नई दिल्ली: यूपी में चुनावी बिगुल बज चुका है. हर रोज कोई नेता दल बदल रहा है. लेकिन अधिकतर सुर्खियां स्वामी प्रसाद मौर्य  बटोरे हुए हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। तबसे खूब कयास लगाए जा रहे थे कि वे सपा का दामन थामेंगे, लेकिन उन्होंने खुद इसका आधिकारिक ऐलान नहीं किया था। मौर्य ने कहा भी था कि शुक्रवार को सब स्पष्ट हो जाएगा। ऐसा हुआ भी, मकर संक्राति के दिन मौर्य पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव  के साथ एक मंच पर दिखाई दिए।
रोक के बावजूद भी इकट्ठी हुई भीड़
आपको बता दें कि कोरोना की तीसरी लहर के बीच हो रहे यूपी विधान सभा चुनाव में संक्रमण की रोकथाम को लेकर चुनाव आयोग ने पहले से ही आगाह कर रखा है कि कोई फिजिकल रैली नहीं करेगा। इसके बावजूद भी सपा कार्यालय पर सदस्यता समारोह में हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट गई। बताते चलें कि स्‍वामी प्रसाद मौर्य, धर्म सिंह सैनी समेत 6 विधायकों ने शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर सपा ज्‍वाइन करली है।
चुनाव आयोग ने रैलियों पर लगाई है पाबंदी
कुछ दिनों पहले ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब सहित 5 राज्यों में विधान सभा चुनावों की तारीखों का ऐलान करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने साफ कर दिया था कि किसी भी राज्य में रैलियों और रोड शो के आयोजन की इजाजत नहीं होगी। इसके अलावा किसी नुक्कड़ सभा का आयोजन भी सार्वजनिक स्थानों पर नहीं किया जा सकेगा। साइकिल रैली और बाइक रैली और पदयात्रा जैसी चीजों पर भी रोक रहेगी। रात 8 बजे के बाद चुनाव प्रचार पर रोक रहेगी। चुनाव आयोग ने चुनावी पार्टियों से कहा था कि वो ज्यादा से ज्यादा वर्चुअल रैली या डिजीटल रैली पर जोर दें। ये सभी पाबंदियां 15 जनवरी तक के लिए लागू की गई थीं।

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