विधानसभा चुनाव 2020 के लिए ‘आप’ ने मिलाया रणनीतिकार प्रशांत किशोर से हाथ

नयी दिल्ली : अगले साल यानी कि वर्ष 2020 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। दिल्ली की सत्तारूढ़ पार्टी इन चुनावों में राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सहायता लेने जा रही है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को यह घोषणा की है कि आम आदमी पार्टी (आप) के चुनावी अभियान को प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन-पैक (आईपैक) संभालेगी। बता दें कि 2015 के चुनाव में आप ने 70 में से 67 सीटों पर सफलता हासिल की थी।

इस पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मुख्यमंत्री केजरीवाल के ट्वीट को रीट्वीट किया है जिसे ट्रोल किया जाने लगा है। सिसोदिया ने लिखा, “अबकी बार 67 पार।” इस ट‌्विट की प्रत‌िक्रिया में एक व्यक्ति ने लिखा , “नारा लाए तो वह भी चोरी का।” वहीं, एक और व्यक्ति ने लिखा, “इसबार, एकदम बाहर।”

कई पार्टियों को पहनाया है जीत का ताज

प्रशांत किशोर की चर्चा एक सफल चुनावी रणनीतिकार के रूप में की जाती है। 2014 में हुए आम चुनाव में प्रशांत ने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव अ‌भियान को संभाला था। उनकी रणनीतियों के साथ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने सफलता हासिल की और माेदी देश के प्रधानमंत्री चुने गए। मोदी की जीत के साथ ही चुनाव अभियान संभालने वाले प्रशांत भी लोकप्रिय बन गए। वहीं, जब उन्होंने बीजेपी से हटकर 2015 में बिहार के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के साथ हाथ मिलाया तब नीतीश कुमार महागठबंधन में भारी बहुमत के साथ मुख्यमंत्री बने। इस जीत के बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पार्टी में बतौर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वे शामिल कर लिए गए। उन्होंने 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के साथ काम किया और कांग्रेस की जीत के साथ ही कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के मुख्यमंत्री बन गए।

ममता के लिए चुनाव रणनीति तैयार कर रहे हैं प्रशांत

इसके अलावा हाल ही में हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव,2019 में जगन मोहन रेड्डी को एकतरफा सफलता प्राप्त हुई थी। उनके चुनाव अभियान का जिम्मा भी प्रशांत की संस्‍था ने ही संभाला था। वहीं, महाराष्ट्र चुनाव के पूर्व यह खबरें भी सामने आई थीं कि शिवसेना ने प्रशांत के साथ हाथ मिलाया है। प्रशांत वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए चुनाव रणनीति तैयार कर रहे हैं।

2017 में हुए विधानसभा चुनाव में हारी थी कांग्रेस

हालांकि प्रशांत पर उत्तरप्रदेश कांग्रेस की करारी हार का भी दाग है। राज्य में 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में प्रशांत को कांग्रेस के चुनाव प्रचार का भार सौंपा गया था। इस चुनाव में बीजेपी ने तीन-चौथाई बहुमत से जीत हासिल की थी और कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था।

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