58 साल बाद चीन ने फिर दिया धोखा, लद्दाख में तनाव पर बात करने गए भारतीय सैनिकों पर हमला, कर्नल सहित 20 शहीद

43 चीनी सैनिक भी हताहत
नयी दिल्ली : 1962 के युद्ध के समय चीन ने जिस तरह धोखा दिया था, वैसी ही दगाबाजी उसने 58 साल बाद फिर कर डाली। पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में सोमवार दोपहर बाद बातचीत करने गए भारतीय सैन्य दल पर चीनी सैनिकों ने अचानक हमला कर दिया। भारतीय सैनिकों ने भी मुंह तोड़ जवाब दिया। कई घंटे चली खूनी झड़प में कर्नल सहित 20 भारतीय शहीद हो गये जबकि चीन के करीब चार दर्जन सैनिक हताहत हो गये।भारतीय सेना ने इस बात की पुष्टि की कि गत रात्रि हुई बिना गोलीबारी वाली इस हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हुए हैं। दूसरी ओर चीन के कम से कम 43 सैनिक हताहत हुए हैं। बताया जाता है कि बुरी तरह घायल कर्नल संतोष बाबू, हवलदार पलानी और सिपाही कुंदन ओझा ने तत्काल दम तोड़ दिया जबकि घटनास्थल के रात में शून्य से नीचे के तापमान में कड़कड़ती ठंड में बाकी 17 जख्मी जवानों की सुबह होने तक मृत्यु हो गयी। सरकारी एवं सैन्य सूत्रों ने बताया कि दोनों तरफ के सैनिकों के बीच झड़प कई घंटे चली।चीनी सेना को भी भारी नुकसान पहुंचा है। समाचार एजेंसियों ने सूत्रों के हवाले से बताया कि झड़प में चीन के 43 से ज्यादा सैनिक हताहत हुए हैं। हालांकि चीन सरकार और चीनी सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने इस पर चुप्पी साधी हुई है, अलबत्ता चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स के प्रधान संपादक ने स्वीकार किया है कि पीएलए के कई सैनिक हताहत हुए हैं।

एक भी गोली नहीं चली, पर…

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि दोनों ओर से कोई गोलीबारी नहीं हुई। लद्दाख में पेट्रोलिंग पॉइन्ट 14 पर हुए हिंसक टकराव के दौरान शहीद हुए कर्नल संतोष बाबू बिहार रेजिमेंट अफसर गलवान में एक बटालियन का कमांडिंग अफसर थे। अन्य दो शहीदों में हवलदार पलानी और सिपाही कुंदन ओझा झारखंड के थे। सूत्रों ने बताया कि सभी सैनिक चीन की ओर से किये गये पथराव में घायल हुए जिसके बाद उनका निधन हो गया। दोनों पक्षों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी गलवान घाटी में बातचीत कर रहे हैं जिससे तनाव को दूर कर स्थिति को सामान्य किया जा सके।

लाठी-डंडों, पत्थर से हमला

चीनी सैनिकों ने लाठी-डंडों, पत्थर से हमला किया था। बताया जा रहा है कि सूत्रों ने कहा दोनों पक्षों में सेनाओं के पीछे हटने पर बनी सहमति के बावजूद पीछे जाने के बजाय चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी की और लोहे की कीलें लगीं लाठियों से भारत की सेना पर हमला किया।

चीन का भारतीय सैनिकों पर आरोप

चीन ने आरोप लगाया कि भारतीय सैनिकों ने 15 जून को दो बार अवैध गतिविधियों के लिए सीमा रेखा लांघी और चीन के कर्मियों को उकसाया तथा उन पर हमले किये जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच गंभीर मारपीट हुई। साथ ही उसने भारतीय सेना के इस बयान का विरोध किया कि गलवान घाटी में ‘तनाव कम करने की प्रक्रिया’ के दौरान सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। चीन की सरकार द्वारा संचालित समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक खबर में दावा किया भारतीय सैनिकों ने झड़प की शुरुआत की। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स की चीफ रिपोर्टर ने पहले 5 सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की। इसके कुछ देर बाद ही अखार के एडिटर इन चीफ हू शीजिन ने भी स्वीकार किया है कि झड़प में चीनी सैनिक मारे गये हैं।

रक्षामंत्री ने सेना प्रमुखों से की बात

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत और तीन सेनाओं के प्रमुखों के साथ पूर्वी लद्दाख में वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। बैठक में विदेशमंत्री एस जयशंकर भी मौजूद थे। सूत्रों ने बताया कि सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे का दिल्ली के बाहर एक बेस का दौरा रद्द कर दिया गया है। यह घटना जनरल नरवणे के उस बयान के कुछ दिन बाद हुई है जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के सैनिक गलवान घाटी से पीछे हट रहे हैं।

विवाद खत्म करने के प्रयास जारी

इस विवाद को खत्म करने के लिए पहली बार गंभीरता से प्रयास करते हुए लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह और तिब्बत सैन्य जिले के मेजर जनरल लीयू लिन ने छह जून को करीब सात घंटे तक बैठक की थी। बैठक के बाद मेजर जनरल स्तर की दो दौर की वार्ता हुई। भारतीय पक्ष उन क्षेत्रों में से हजारों चीनी सैनिकों की तत्काल वापसी पर जोर दे रहा है जो भारत के हैं, लेकिन कब्जे के इरादे से चीनी सैनिक आ घुसे हैं। एजेंसियां
अपने 3 जवानों ने मौके पर दम तोड़ा, 17 गंभीर थे, चोटों ने बर्फीली ठंड में ले ली जान
क्या है गलवान घाटी का महत्व, जहां 41 दिन से आमने-सामने हैं भारत-चीन
गलवान घाटी पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गलवान नदी के दोनों ओर है। यह भारतीय पूर्वी लद्दाख और चीन के कब्जे वाले अक्साई चिन के ठीक बीच में स्थित है। यहां से चीन अपना वन बेल्ट, वन रोड निकाल रहा है, जो पाकिस्तान की बंदरगाह तक जाएगा। जब चीन ने पूर्वी लद्दाख में अतिक्रमण की कोशिश की तो भारत ने सैनिक उतार दिए और बड़े पैमाने पर वहां सै​न्य महत्व की सड़कें और पुल बनाना शुरू कर दिया। इससे चीन को अपनी महत्वाकांक्षी योजना वन बेल्ट, वन रोड को खतरा नजर आ रहा है, इसी कारण वह इस पर विवाद पैदा कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तीन घंटे की बैठक, शाह भी मौजूद रहे
नयी दिल्ली : पूर्वी लद्दाख प्रकरण को लेकर नई दिल्ली में दिनभर उच्च स्तरीय बैठकें हुईं। पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सि​ंह ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ​बिपिन रावत और तीनों सेना अध्यक्षों के साथ बैठक की। इसके बाद रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हालात से अवगत कराया। देर शाम करीब 8 बजे से रात 11 बजे तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक करने गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे। इस बीच भारतीय सेना ने फिर दोहराया है कि किसी भी कीमत पर भारतीय क्षेत्र की रक्षा की जाएगी और किसी को भी कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।
भारत ने कहा : यथास्थिति बदलने की चीन की एकतरफा कोशिश का नतीजा
भारत ने कहा कि पूर्वी हिंसक झड़प चीन की क्षेत्र की यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश का नतीजा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के जवान हताहत हुए। इस झड़प को टाला जा सकता था अगर चीन ने उच्चस्तरीय बैठकों में हुई सहमतियों पर गंभीरता से अमल किया होता। भारत का इस बात को लेकर स्पष्ट है कि एलएसी पर जो भी चीनी गतिविधि हुई वह भारतीय क्षेत्र में ही हुई। भारत चीन से उम्मीद रखता है कि वह भी दोनों पक्षों में हुई सहमति पर अक्षरशः अमल करे। भारत सीमा पर शांति और अमन बहाली के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, वह अपनी सीमाई एकता और सार्वभौमिकता सुनिश्चित करने के लिए भी उतना ही प्रतिबद्ध है।

 

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