33 साल से 10वीं की परीक्षा में हो रहा था फेल, 34वें साल बिना मेहनत हो गया पास

नयी दिल्ली : हैदराबाद के एक शख्स ने उस वक्त यह कहावत कि ‘करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान’, को सच साबित कर दिया जब उसने 33 साल की लगातार नाकामयाबी के बावजूद 34वें साल दसवीं की परीक्षा में कामयाबी हासिल कर ली। मोहम्मद नूरुद्दीन ने ऐसे वक्त में यह कमयाबी हासिल की जब कोरोना महामारी के चलते देश के लाखों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को भारी नुकसान हुआ है। इक्यावन साल के नूरुद्दीन पिछले 33 सालों से लगातार 10वीं की परीक्षा दे रहे थे और हर बार फेल होते आ रहे थे लेकिन इस बार जब राज्य सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण फैलने से रोकने के लिए 10वीं के सभी छात्रों को प्रमोट करने का फैसला किया तो इसका फायदा इस शख्स को भी मिल गया।

पहली बार 1987 में 10वीं की परीक्षा दी थी

नूरुद्दीन ने एक भेंट में बताया कि उन्होंने पहली बार 1987 में 10वीं की परीक्षा दी थी। अंग्रेजी कमजोर होने के चलते हर बार परीक्षा में फेल हो रहे थे। कोई ट्यूशन पढ़ाने वाला भी नहीं था। उन्होंने कहा इस बार मैं पास हो गया हूं क्योंकि इस कोविड-19 की वजह से सरकार ने छूट दे दी है। उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए 10वीं पास होना जरूरी था। इसलिए वे लगातार परीक्षा देते गये। आगे चलकर हालांकि उन्हें बिना 10वीं पास हुए ही सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गयी लेकिन उन्होंने परीक्षा देना जारी रखा। उन्हें 7000 रुपये वेतन मिलता है औऱ वे चार बच्चों के पिता हैं। उन्होंने कहा कि अब वे ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन भी करना चाहते हैं। पढ़ेलिखे व्यक्ति की हर जगह इज्जत होती है।

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