हौसले को सलाम…. अब डल झील में चलेगी एंबुलेंस

नई दिल्ली : कश्मीर के प्रसिद्ध डल इलाके में अब मरीजों को झील पार करने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। बल्कि, खुद एंबुलेंस उन्हें झील पार कराएगी, क्योंकि अब झील में एंबुलेंस शिकारा (नाव) चलनी शुरू हो गई है। यह पहल डल के ही रहने वाले एक शख्स ने की जो कुछ महीनों पहले कोरोना की चपेट में आ गए थे। उनका नाम तारीक अहमद है।

तारीक के अनुसार, कुछ महीने पहले जब वह कोरोना संक्रमित हुए थे तो कोई उन्हें हाउसबोट से अस्पताल ले जाने के लिए राजी नहीं था। अस्पताल तक पहुंचने के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस घटना के बाद ही उन्होंने एंबुलेंस शिकारा तैयार करने का फैसला किया ताकि उन लोगों को सहूलियत मिल सके जो डल में और उसके आसपास के इलाकों में रहते हैं।

अपने कष्ट से दूसरों के दर्द को समझा

डल में रहने वाले तारिक अहमद बताते हैं, ‘कुछ महीने पहले जब मैं टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया तो वह मेरे और मेरे परिवार के लिए काफी कष्टदायक समय था। किसी ने भी अस्पताल तक पहुंचने के लिए मुझे झील पार करने में मदद नहीं की। बीमारी की हालत में मुझे काफी तकलीफ झेलकर अस्पताल जाना पड़ा। लोगों की इसी उपेक्षा ने मुझे महसूस कराया कि झील के लिए एक वैसी नाव का होना कितना आवश्यक था जिसमें मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध रहे।’

लगाए जा रहें मेडिकल इक्विपमेंट

तारिक अहमद को नाव बनाने में करीब एक महीने का समय लगा। उन्होंने इस शिकारे को बनाने में ज्यादातर लकड़ी की पारंपरिक सामग्री का इस्तेमाल किया है। वह इसमें मेडिकल इक्विपमेंट लगा रहे हैं। वह कहते हैं, ‘यह झील में जरूरतमंद लोगों के लिए एक हेल्पलाइन की तरह होगी। इस शिकारे में एक फोन नंबर होगा जिस पर लोग कॉल कर सकते हैं और नाव उनकी मदद के लिए दौड़ पड़ेगी। हम इसमें मोटर भी लगा रहे हैं जिससे मदद के लिए समय पर पहुंचा जा सके। एंबुलेंस आपात स्थिति के दौरान लोगों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगी।’

पर्यटकों के लिए भी बनेगी जीवन रक्षक

तारिक अहमद कहते हैं कि, उन्होंने ऐसी कई कहानियां सुनी हैं जहां इस तरह की मेडिकल सुविधाओं की कमी के कारण झील के आसपास रहने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। वहीं यह झील पर्यटकों के लिए भी एक शानदार जगह है, यह नाव उनके लिए भी जीवन रक्षक साबित होगी। कई बार पर्यटकों को भी यहां पर स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को झेलना पड़ा है। यदि वे बीमार पड़ते हैं तो उन्हें इलाज की आवश्यकता होती है। अब हम उन्हें इस सुविधा के माध्यम से समय पर उपचार मुहैया करा सकेंगे।’

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