हैकथन से राष्ट्र प्रगति के शिखर पर होगा: निशंक

नयी दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा है कि कोरोना काल में देश को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने के लिए ‘हैकथन’ के जरिये प्रगति के शिखर पर ले जाएंगे। डॉ निशंक ने शनिवार को यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पहली बार हो रहे ऑनलाइन हैकथन के ग्रैंड फाइनल को लॉन्च करते हुए यह बात कही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4:00 बजे इस ऑनलाइन हैकथन(सॉफ्ट वेयर) के ग्रैंड फाइनल को संबोधित करेंगे। डॉ निशंक ने कहा कि हैकथन प्रतियोगिता से कम समय में यानी केवल 36 घंटे में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय, राज्य सरकार के विभागों और उद्योग जगत की समस्याओं को सुलझाया जाएगा। यह हमारे लिए अत्यंत खुशी का क्षण है कि हम देश में फैली कोरोना महामारी के बीच इस प्रतियोगिता को आयोजित कर रहे हैं जिसमें हजारों छात्र भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता के जरिये हम देश की समस्याओं को सुलझाएंगे और पहले भी इस प्रतियोगिता के जरिये हमने कई समस्याओं को सुलझाने का काम किया है।

आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए यह एक सुंदर मंच

उन्होंने कहा कि हैकथन से छात्र-छात्राओं के बीच प्रतिस्पर्धा का भाव बढ़ा है और देश की समस्याओं को सुलझाने का एक जज्बा भी पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए यह एक सुंदर मंच साबित हो रहा है और इससे आज से हम राष्ट्र को प्रगति के शिखर पर ले जाएंगे। इस लांच समारोह को शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे आदि ने भी सम्बोधित किया। गौरतलब है कि कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान स्मार्ट इंडिया हैकथन कार्यक्रम ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है जो एक अगस्त से तीन अगस्त तक चलेगा। यह चौथा स्मार्ट इंडिया हैकथन है जिसके फाइनल में 10,000 से अधिक प्रतिभागी 26 घंटे तक तक समस्याओं का डिजिटल समाधान निकालेंगे।

निदान के लिए 100000 रुपये की पुरस्कार राशि

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश सचिव राकेश रंजन तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मुख्य नवाचार अधिकारी अभय जेरे भी शामिल थे। डॉ निशंक पहले कह चुके है कि स्मार्ट इंडिया हैकथन का फाइनल इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि उसके फाइनल में 10,000 से अधिक छात्र भाग लेंगे और 20 कम्पनियों और 17 राज्यों तथा 37 केंद्रीय सरकारी विभागों की 243 समस्याओं का निदान करेंगे। हर समस्या के निदान के लिए 100000 रुपये की पुरस्कार राशि तय की गई है। नवाचार विषय में पहले विजेता को एक लाख, दूसरे विजेता को 75000 तथा तीसरे विजेता को 50000 रुपये दिए जाएंगे। पहला स्मार्ट इंडिया हैकथन 2017 में हुआ था जिसमें 42000 छात्रों ने भाग लिया था और उनकी संख्या 2018 में बढ़कर एक लाख तथा 2019 में बढ़कर 200000 हो गई थी तथा गत वर्ष इनकी संख्या साढे चार लाख से भी अधिक हो गई थी। स्मार्ट इंडिया हैकथन से आज तक 71 स्टार्टअप बन रहे हैं 19 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं तथा 331 प्रोटोटाइप विकसित हो गए हैं और 39 सॉल्यूशन्स का विभिन्न विभागों में इस्तेमाल किया जा रहा है और 64 अन्य सॉल्यूशन्स विकसित किये जा रहे हैं।

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