रामलला की हुई विवादित जमीन

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नई दिल्ली :  सु्ुप्रीम कोर्ट ने रामलला को कोर्ट में मुख्य पक्षकार माना है और निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज करते हुए उन्हें सेवादार भी नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी नीचे विशाल रचना थी, वह रचना इस्लामिक नहीं थी। वहां मिली कलाकृतियां भी इस्लामिक नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद में रामलला को कानूनी मान्यता दी, कहा- खुदाई के सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते।

सुन्नी बोर्ड का यह कहना है कि बाबरी मस्जिद के निर्माण से लेकर ढहाए जाने तक नमाज पढ़ी जाती थी। बाहरी प्रांगण में हिंदुओं द्वारा पूजा किया जाता था। दोनों धर्मों द्वारा शांतिपूर्ण पूजा सुनिश्चित करने के लिए एक रेलिंग की स्थापना की गई। 1856-57 से पहले आंतरिक अहाते में हिन्दुओं पर कोई रोक नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा –

  • सुन्नी वक्फ बोर्ड के लिए शांतिपूर्ण कब्जा दिखाना असंभव है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जमीन पर मालिकाना हक मांगा है और सबूत पेश किए कि हिंदू बाहरी अहाते में पूजा करते थे- चीफ जस्टिस
  • मुस्लिम गवाहों ने भी माना कि दोनों पक्ष वहां पूजा करते थे- चीफ जस्टिस
  • एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक खाली जमीन पर मस्जिद नहीं बनी थी – सीजेआई रंजन गोगोई
  • मस्जिद किसने बनवाई यह भी स्पष्ट नहीं है –  सीजेआई रंजन गोगोई
  • हिंदू अयोध्या को राम का जन्मस्थल मानते हैं-  चीफ जस्टिस
  • एएसआई  रिपोर्ट के मुताबिक नीचे मंदिर था।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विवादित जमीन रामलला को सौंपने के साथ ही 3 महीने के अंदर 5 एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को अन्य स्थान पर दे दिया जाए, जहां मस्जिद का निर्माण हो।

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