किसान-सरकार की बैठक बेनतीजा

नई दिल्लीः केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा से आए हजारों किसानों का पिछले पांच दिनों से हल्ला बोल जारी है। इसी बीच आज छठे दिन किसान नेता सरकार से चर्चा करने पहुंचे, लेकिन ताजा जानकारी के मुताबिक किसान-सरकार की यह बैठक बेनतीजा रहा। किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हैं। अब 3 दिसंबर को बैठक होगी।किसानों का आंदोलन अभी जारी रहेगा। सरकार ने कमेटी बनाने की पेशकश रखी, लेकिन किसान कृषि कानूनों को खत्म करने की मांग पर अड़े। किसानों का कहना है अभी आंदोलन का और विस्तार होगा।

केंद्र और किसानों के बीच बातचीत का दूसरा दौर शुरू हो चुका है। दो घंटे चले पहले दौर में किसान प्रतिनिधियों के सामने केंद्र ने मिनिमम सपोर्ट प्राइज (एमएसपी) पर प्रेजेंटेशन दिया। उनके सामने प्रस्ताव रखा कि नए कानूनों पर चर्चा के लिए कमेटी बनाई जाए, इसमें केंद्र, किसान और एक्सपर्ट शामिल हों। रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसानों ने ये पेशकश ठुकरा दी है। एक ब्रेक के बाद फिर मीटिंग शुरू हुई, लेकिन ये कुछ ही देर में खत्म हो गई। अब अगली बातचीत 3 दिसंबर को होगी।

न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि किसानों के 35 प्रतिनिधियों ने एक सुर में यही बात कही कि कानूनों को खत्म कर दिया जाए, क्योंकि ये किसानों के हितों के खिलाफ हैं।

दिल्ली के विज्ञान बैठक में किसानों की सरकार के साथ बैठक शुरू हो गई है। बैठक से पहले कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- हम उनके मुद्दे सुलझाने पर चर्चा करेंगे। उनकी बात सुनने के बाद सरकार इनका हल निकालेगी। बैठक में तोमर के साथ वाणिज्य मंत्री सोम प्रकाश और रेल मंत्री पीयूष गोयल मौजूद हैं। सरकार के बुलावे पर किसानों ने कहा था कि वे बैठक के लिए इसलिए तैयार हुए हैं, क्योंकि इस बार सरकार ने कोई शर्त नहीं रखी है। इधर, हरियाणा के निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने खट्टर सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। चरखी दाददी में सांगवान ने कहा- किसानों पर हुए अत्याचारों को देखकर मैं सरकार से अपना समर्थन वापस लेता हूं।
पहले पंजाब के किसानों को ही न्योता मिला था
सरकार ने सोमवार देर रात किसानों को बातचीत का न्योता भेजा था। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि जो किसान नेता 13 नवंबर की बैठक में शामिल थे, उन्हें न्योता दिया गया है। हालांकि, इस पर विवाद हो गया। दरअसल, कृषि विभाग के सचिव की तरफ से जारी हुई न्योते की चिट्‌ठी में 32 किसानों के नाम थे। ये सभी पंजाब के किसान नेता थे। ये हरियाणा के अपने साथियों का नाम भी शामिल करने का दबाव बनाने लगे। इसके बाद न्योते में हरियाणा से गुरनाम चढ़ूंनी और मध्यप्रदेश से किसान नेता शिवकुमार शर्मा कक्काजी का नाम शामिल किया गया। सिंघु बॉर्डर 32 साल बाद सबसे बड़े किसान आंदोलन का गवाह बना है। 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के 5 लाख किसान यहां जुटे थे। किसानों के मुद्दे पर सरकार 36 घंटे में तीन बैठकें कर चुकी है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर मंगलवार को हुई मीटिंग में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद थे। बैठक में शामिल होने के लिए शाह बीएसएफ के राइजिंग डे इवेंट में नहीं गए।

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