सबसे बड़ी संभावना लड़ेंगे भी और बढ़ेंगे भी

 आत्मनिर्भर भारत के ​लिए बताए 5 स्तम्भ

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘मैंने अपनी आंखों के साथ कच्छ भूकंप के दिन देखे हैं। हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा। सबकुछ ध्वस्त हो गया था। ऐसा लगता था मानो कच्छ मौत की चादर ओढ़ कर सो गया था। उस परिस्थिति में कोई सोच भी नहीं सकता था कि कभी हालत बदल पाएगी। लेकिन देखते ही देखते कच्छ उठ खड़ा हुआ। यही हम भारतीयों की संकल्प शक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं, कोई राह मुश्किल नहीं। और आज तो चाह भी है, राह भी है। ये है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। भारत आत्मनिर्भर बन सकता है। इसके 5 आधार ‘स्तम्भ’ मजबूत बनाने होंगे। इनमें पहला स्तम्भ (पिलर) है अर्थव्यवस्था (इकोनॉमी)। एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो वृद्धिशील परिवर्तन (इन्क्रीमेंटल चेंज) नहीं बल्कि परिमाण वृद्धि (क्वांटम जम्प) लाये। दूसरा स्तम्भ बुनियादी सुविधाएं (इन्फ्रास्ट्रक्चर) हैं जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा स्तम्भ सिस्टम (व्यवस्था) है जो पिछली सदी की रीति नहीं बल्कि 21वीं शताब्दी की प्रौद्योगिकी प्रेरित व्यवस्था पर आधारित हो। चौथा स्तम्भ जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी)। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जनसांख्यिकी आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्रोत है और पांचवां स्तम्भ मांग (डिमांड) है। मांग का चक्र और इसकी ताकत का इस्तेमाल किये जाने की जरूरत है।
21वीं सदी, भारत की सदी : उन्होंने कहा, ‘हमारे यहां कहा गया है- ‘सर्वम् आत्म वशं सुखम्’ अर्थात, जो हमारे वश में है, जो हमारे नियंत्रण में है वही सुख है। आत्मनिर्भरता हमें सुख और संतोष देने के साथ-साथ सशक्त भी करती है। 21वीं सदी, भारत की सदी बनाने का हमारा दायित्व, आत्मनिर्भर भारत के प्रण से ही पूरा होगा। इस दायित्व को 130 करोड़ देशवासियों की प्राणशक्ति से ही ऊर्जा मिलेगी। आत्मनिर्भर भारत का ये युग, हर भारतवासी के लिए नूतन प्रण भी होगा, नूतन पर्व भी होगा।’

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