संविधान दिवस : प्रधानमंत्री बोले- समय के साथ महत्व खो चुके कानूनों को हटाना जरूरी

केवडियाः संविधान दिवस के मौके पर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। गुजरात के केवडिया में प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपना संबोधन दिया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संविधान और कानून को लेकर अपने विचार रखे। आज मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी की बरसी भी है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मुंबई हमले के जख्म भारत भूल नहीं सकता। नया भारत नई रीति-नीति के साथ आतंकवाद का मुकाबला कर रहा है। आतंक को मुंहतोड़ जवाब देने वाले हमारे सुरक्षाबलों का भी वंदन करता हूं।

प्रधानमंत्री ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि पीठासीन अधिकारी होने के नाते आपका रोल अहम हो जाता है। आप एक अहम कड़ी हैं। आप विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बड़ी भूमिका अदा कर सकते हैं। न्यायपालिका की अपनी भूमिका होती है, लेकिन स्पीकर लॉ मेकिंग बॉडी का फेज होता है। संविधान के तीनों अंगों की भूमिका से लेकर मर्यादा तक संविधान में अंकित है।

कोरोना का जिक्र किया
मोदी ने कहा कि इमरजेंसी के दौर के बाद विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका काफी कुछ सीखकर आगे बढ़े। कोरोना काल में भारत की 130 करोड़ की जनता ने परिपक्वता का परिचय दिया है। इस दौरान संसद के दोनों सदनों में तय समय से ज्यादा काम हुआ है। सांसदों ने वेतन में कटौती कर प्रतिबद्धता जताई है। कोरोना दौर में हमारी चुनाव प्रणाली भी दुनिया ने देखी। समय पर नतीजे आना और नई सरकार बनना इतना आसान नहीं है।

संविधान से मिली ताकत इसे आसान बनाती है। आने वाले समय में संविधान 75वें वर्ष की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में व्यवस्थाओं को समय के हिसाब से बनाने के लिए हमें संकल्पित भाव से काम करना होगा। संकल्प को सिद्ध करने के लिए विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को एक साथ मिलकर काम करना है।

केवडिया डैम को लेकर कहा

आज केवडिया डैम का लाभ गुजरात के साथ मध्य प्रदेश और राजस्थान को भी हो रहा है। जब राजस्थान को पानी पहुंचाया तो मुझसे मिलने भैरों सिंह शेखावत और जसवंत सिंह मिलने आए और मुझे आशीर्वाद दिया। जनता से जुड़ी ये परियोजना लंबे समय तक अटकी रही। ये बरसों पहले हो सकता था, लेकिन जनता को इससे दूर रखा गया। जिन्होंने ऐसा किया, उन्हें कोई मलाल, कोई शिकन तक नहीं। हमें देश को इससे निकालना होगा। सरदार पटेल की मूर्ति के सामने जाकर एक नई ऊर्जा मिलती है। स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को देखकर गौरव की अनुभूति होती है।

‘संविधान की भाषा ऐसी हो जो सभी को समझ आए’
हर नागरिक का आत्मविश्वास बढ़े, संविधान की भी यही अपेक्षा है। यह तभी होगा, जब हम कर्तव्यों को प्राथमिकता देंगे। लेकिन पहले के दौर में इसे ही भुला दिया गया। संविधान में हर नागरिक के लिए कर्तव्यों का जिक्र है। हमारी कोशिश ये होनी चाहिए कि संविधान के प्रति आम नागरिकों की समझ बढ़े। केवाइ ऱ्सी एक नए रूप में सामने आना चाहिए- नो योर कंस्टिट्यूशन। संविधान की भाषा ऐसी होनी चाहिए, जो सबको समझ आए।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन पर विचार जरूरी’
मोदी ने वन नेशन, वन इलेक्शन पर सोच-विचार को जरूरी बताते हुए कहा कि पीठासीन अधिकारी इस बारे में गाइड कर सकते हैं। पूरी तरह डिजिटाइजेशन का समय आ गया है। पीठासीन अधिकारी इसे सोचेंगे तो विधायकों को आसानी होगी। अब हमें पेपरलेस तरीकों पर जोर देना चाहिए। संविधान सभा इस बात को लेकर एकमत थी कि भारत में बहुत सी बातें परंपराओं से स्थापित होंगी। विधानसभा में चर्चा से ज्यादा से ज्यादा लोग कैसे जुड़ें, इसके लिए कोशिशें होनी चाहिए। जिस विषय की सदन में चर्चा हो, उनसे संबंधित लोगों को बुलाया जाए। मेरे पास तो सुझाव हैं, लेकिन आपके पास अनुभव है।

जानें संविधान दिवस का महत्व

डॉ. भीम राव अम्बेडकर एक प्रसिद्ध समाज सुधारक, राजनीतिज्ञ और न्यायविद थे और उन्हें भारतीय संविधान का जनक भी कहा जाता है। उन्हें 29 अगस्त, 1948 को संविधान मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

क्या है भारत का संविधान ?

देश का संविधान, भारत सरकार के लिखित सिद्धांतों और उदाहरणों का समूह है जो मूलभूत, राजनीतिक सिद्धांतों, प्रक्रियाओं, अधिकारों, निर्देश सिद्धांतों, प्रतिबंधों और सरकार, देश के नागरिकों के कर्तव्यों को पूरा करता है।

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