शवों से कोविड-19 के फैलने का कोई साक्ष्य नहीं है : हाई कोर्ट

मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि मुंबई नगर निकाय के पास कोविड-19 के कारण जान गंवाने वाले लोगों के शवों का निस्तारण करने के लिए किसी भी कब्रिस्तान को नामित करने का अधिकार है और ऐसा कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ जो यह दिखाता हो कि कोरोना वायरस मुर्दों से भी फैलता है।
मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एस एस शिंदे के खंडपीठ ने उन याचिकाओं को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें बीएमसी द्वारा जारी 9 अप्रैल के परिपत्र को चुनौती दी गयी थी। बीएमसी ने परिपत्र जारी कर कोरोना वायरस के कारण मरने वाले लोगों के शवों के निस्तारण के लिए 20 कब्रिस्तानों को चिह्नित किया था। अदालत ने कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा जारी किया गया परिपत्र कानून के अनुरूप है और नगर निकाय के पास ऐसे मरीजों के शवों के निस्तारण के लिए कब्रिस्तानों को चिह्नित करने का पूरा अधिकार है। पीठ ने कहा कि नगर निकाय और अन्य संबंधित प्राधिकरण कोविड-19 के मरीजों के शवों का सुरक्षित निस्तारण करने के लिए भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों का अनुपालन करें।
लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाली महिला पुलिसकर्मी की प्रशंसा
महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने मुंबई में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान चार लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए महिला पुलिस कर्मी की तारीफ की है। गुरुवार रात को ट्विटर पर मंत्री ने कहा कि पुलिस नायक संध्या शीलवंत ने एक दिन में चार व्यक्तियों का अंतिम संस्कार किया और अपने कर्तव्य के प्रति उनका समर्पण सराहनीय है। कुछ मृतक बेसहारा थे, जबकि एक व्यक्ति कोविड-19 से संक्रमित था और उसके रिश्तेदारों ने उसके शव पर दावा नहीं किया था। शीलवंत मध्य मुंबई के शाहू नगर थाने से संबद्ध हैं और उनका काम क्षेत्र में दुर्घटनावश होने वाली मौतों का पंजीकरण करना है। वह लावारिस लाशों को लेकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजती हैं और उनके परिवारों को तलाशती हैं और जिन शवों पर कोई दावा करने नहीं आता, उनका अंतिम संस्कार कराती हैं। शीलवंत ने कहा, ‘लॉकडाउन के बाद से हम छह ऐसे शवों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं, जिन पर किसी ने दावा नहीं किया है।’
शव में कोरोना वायरस के जिंदा रहने की अवधि का अध्ययन करने की योजना
वहीं, नयी दिल्ली में एम्स के डॉक्टर यह अध्ययन करने के लिए कोविड-19 से मरने वाले व्यक्ति का पोस्टमॉर्टम करने पर विचार कर रहे हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण कितने समय तक किसी शव में रह सकता है और क्या इससे संक्रमण का फैलाव हो सकता है?दिल्ली के अस्पताल के फॉरेंसिक प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि इस अध्ययन से यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि विषाणु कैसे मानव अंगों पर असर डालता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए मृतक के कानूनी वारिस से सहमति ली जाएगी। डॉ. गुप्ता ने कहा कि इस अध्ययन में रोग विज्ञान और अणुजीव विज्ञान जैसे कई और विभाग भी शामिल होंगे। अभी तक मौजूद वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार किसी शव में वायरस धीरे-धीरे खत्म होता है लेकिन अभी शव को संक्रमण मुक्त घोषित करने के लिए कोई निश्चित समय सीमा नहीं है। शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था आईसीएमआर ने मंगलवार को कहा था कि कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों का बिना चीर-फाड़ किए पोस्टमॉर्टम करने की तकनीक अपनाने की सलाह दी जाती है।

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