इलाहाबाद से वाराणसी तक नौका से ‘गंगा-जमुनी तहजीब यात्रा’ निकालेंगी प्रियंका

लखनऊः उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के आधार को मजबूत करने और लोकसभा चुनाव में अच्छे नतीजे की कोशिश में जुटीं पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा 18 मार्च से इलाहाबाद से नौका के जरिए ‘गंगा-जमुनी तहजीब यात्रा’ की शुरुआत करेंगी। इसका समापन अगले दिन (19 मार्च को) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में होगा। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर प्रियंका के प्रयागराज से वाराणसी नदी मार्ग द्वारा मोटर बोट से सफर करने की अनुमति मांगी थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला के मुताबिक, प्रियंका अपनी दो दिवसीय यात्रा में करीब 140 किलोमीटर का सफर तय करेंगी और इस दौरान विभिन्न स्थानों पर वह कार्यकर्ताओं और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से मुलाकात करेंगी।
अस्सी घाट पर स्‍वागत समारोह
प्रियंका के लिए 19 मार्च की शाम को वाराणसी के मशहूर अस्सी घाट पर एक स्वागत समारोह भी रखा गया है और वह 20 मार्च को दिल्ली रवाना होने से पहले काशी विश्वनाथ के दर्शन भी करेंगी। शुक्ला ने बताया कि कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका 17 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगी और रात में इलाहाबाद जाएंगी। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में छटनाग से 18 मार्च की सुबह वह ‘गंगा-जमुनी तहजीब यात्रा’ शुरू करेंगी और करीब 40 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर वाराणसी के निकट दमदमा पहुंचेंगी जहां वह एक स्वागत कार्यक्रम में भाग लेने के साथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से मुलाकात करेंगी।
ऐसा है कार्यक्रम
शुक्ला ने बताया कि इसके बाद नौका से ही वह लाक्षागृह जाएंगी जहां 18 मार्च की रात में वह विश्राम करेंगी। अगले दिन यानी 19 मार्च को वह माढहा नामक स्थान पर स्वागत समारोह में शामिल होंगी। उन्होंने बताया कि प्रियंका सीतामढ़ी और रामपुर होते हुए विंध्याचल मंदिर में दर्शन करेंगी। फिर वह चुनार जाएंगी और शीतला माता मंदिर में दर्शन करेंगी। इसके बाद उनका वाराणसी के अस्सी घाट पहुंचने का कार्यक्रम है जहां उनका स्वागत होगा और इसके साथ ही उनकी इस यात्रा का समापन होगा। प्रियंका 20 मार्च को काशी विश्वनाथ के दर्शन करेंगी और फिर दिल्ली रवाना होंगी। लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष रहे प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने कहा ‘मेरी स्मृति में उत्तर प्रदेश में नदी मार्ग का उपयोग चुनाव प्रचार के लिए या यों कहें जनता से चुनावी संवाद के लिए पहली बार किया जा रहा है।’
नदी मार्ग से प्रचार का प्रश्न कहां उठता था
उन्होंने कहा ‘यह एक अलग तरीका है। उससे प्रियंका चर्चा में रहेंगी। यह प्रचार का तरीका होता है।’ यह पूछा गया कि नदी किनारे कौन सा वर्ग है जिन्हें साधने का प्रयास शायद प्रियंका कर रही हैं ? दीक्षित ने कहा कि नदी के किनारे आम तौर पर केवट, निषाद और मल्लाह रहते हैं। कुल मिलाकर अन्य पिछडे़ वर्ग का एक बड़ा वर्ग वहां निवास करता है। राजनीतिक विश्लेषक प्रद्युम्न कुमार तिवारी ने कहा कि वाराणसी से प्रयागराज के बीच नदी मार्ग संचालित हो रहा है। यह अभी हाल ही में शुरू हुआ है इसलिए इसका उपयोग भी हो रहा है। इससे पहले नदी मार्ग नहीं था तो नदी मार्ग से प्रचार का प्रश्न कहां उठता था। गौरतलब है कि 23 जनवरी को कांग्रेस की महासचिव-प्रभारी नियुक्त होने के बाद से प्रियंका पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से लगातार मुलाकात कर रही हैं।

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