सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राफेल सौदे पर कोई संदह नहीं

नयी दिल्ली : राफेल डील में मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर फ्रांस के साथ हुई डील की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राफेल खरीद की प्रक्रिया में विशेष कमी नहीं रही है और केंद्र के 36 विमान खरीदने के फैसले पर सवाल उठाना सही नहीं है। विमान की क्षमता में कोई कमी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की निगरानी में राफेल डील को लेकर जांच करवाने की सभी याचिकाओं को रद्द कर दिया। बता दें कि मनोहर लाल शर्मा, विनीत ढांडा, आम आदमी पार्टी के सासंद संजय सिंह, प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा की याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया। इन याचिकाओं में राफेल सौदे की कीमत और उसके फायदों की जांच कराने की मांग की गयी थी और कहा गया था कि ज्यादा कीमतों पर डील हुई और गलत तरीके से ऑफसेट पार्टनर चुना गया। इसलिए डील रद्द की जाये। याचिका रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हम पूरी तरह से संतुष्ट है कि राफेल सौदे की प्रक्रिया में कोई कमी नहीं रही। कहा कि देश को सामरिक रूप से सक्षम रहना आवश्यक है। अदालत के लिए अपीलकर्ता प्राधिकारी के रूप में बैठना और सभी पहलुओं की जांच करना संभव नहीं है।
कोई सबूत नहीं कि सौदे में किसी के व्यापारिक हित साधे गये हों
सुप्रीम कोर्ट के अनुसार ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे साबित होता हो कि इस सौदे में किसी के व्यापारिक हित साधे गये हों। राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद मामले की सुनवाई सीजेआई रंजन गोगोई की पीठ ने की। रंजन गोगोई ने कहा- ऑफसेट पार्टनर और व्यक्तियों की धारणा का चयन करने में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। यह रक्षा खरीद के संवेदनशील मुद्दे में पूछताछ का कारण नहीं हो सकता है। कहा कि हम 126 एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए सरकार को मजबूर नहीं कर सकते और अदालत के लिए इस मामले के हर पहलू की जांच करने के लिए उचित नहीं है। मूल्य निर्धारण विवरण की तुलना करना अदालत का काम नहीं है। बता दें कि राफेल डील को लेकर विपक्षी दलों ने मोदी सरकार के खिलाफ पिछले कई माह से मोर्चा खोल रखा है। इस लिहाज से सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला काफी अहम साबित होगा।
संसद में राहुल गांधी माफी मांगों के नारे गूंजे

सुप्रीम कोर्ट से भाजपा क्लीन चिट मिलने के बाद संसद के दोनों सदनों में काफी हंगामा हुआ, बीजेपी सांसदों ने अपनी सीट से खड़ेकर होकर राहुल गांधी माफी मांगो और राफेल गांधी शर्म करो के नारे लगाए, संसदीय कार्य मंत्री थावर चंद गहलोत ने लोकसभा में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने राफेल डील पर देश को गुमराह किया और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस ने देश को गुमराह किया
कांग्रेस ने देश को गुमराह किया: राजनाथ सिंह

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने देश को गुमराह किया है। राहुल गांधी सदन में माफी मांगें। कांग्रेस ने भारत की छवि खराब की है। आज संसद के शीतकालीन सत्र का चौथा दिन लोकसभा में जोरदार नारेबाजी को देखते हुए स्पीकर सुमित्रा महाजन ने हंगामे की वजह से लोकसभा और राज्यसभा दोनो की कार्यवाही को 17 दिसंबर तक स्थगित कर दिया है तो वहीं राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है। मालूम हो कि आज संसद के शीतकालीन सत्र का चौथा दिन है, आज ही कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने लोकसभा में नोटबंदी और आरबीआई मुद्दे पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है।
झूठ का राजनीति करने वालों के मुंह पर तमाचा है : अमित शाह
राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कांग्रेस पर अमित शाह ने पलटवार किया है. अमित शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय झूठ की राजनीति करने वालों के मुंह पर तमाचा है। राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि मैं सर्वोच्च अदालत के फैसले का स्वागत करता हूं। सच की जीत हुई। आजादी के बाद एक कोरे झूठ के आधार पर देश की जनता को गुमराह किया गया। यह प्रयास देश की सबसे पुरानी पार्टी ने किया। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने व पार्टी के फायदे के लिए झूठ की एक नई राजनीति की शुरुआत की।
राहुल को देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जब-जब सत्ता में रहती है तब तब घोटाले करती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बताएं कि आखिर उनके आरोपों के आधार क्या था? आखिर आपने देश की सुरक्षा को खतरे में क्यों डाला? आखिर आपने किसकी सूचना के आधार पर आरोप लगाए? राफेल खरीद के सम्बन्ध में देश की जनता को गुमराह करने और सेना के बीच में सन्देश पैदा करने के लिए राहुल गांधी को देश की जनता से मांफी मांगनी चाहिए। राहुल गांधी देश की जनता को जवाब दें कि वो किस आधार पर देश की जनता को गुमराह कर रहें थे?

राफेल विमान क्या है?

राफेल एक फ्रांसीसी कंपनी डैसॉल्ट एविएशन निर्मित दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है। राफेल लड़ाकू विमानों को ओमनिरोल विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध में वायु वर्चस्व, हवाई हमला, जमीनी समर्थन, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध आदि में अहम रोल निभाने में सक्षम हैं। राफेल भारत का एकमात्र विकल्प नहीं था। कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माताओं ने भारतीय वायुसेना से पेशकश की थी। बाद में छह बड़ी विमान कंपनियों को छांटा गया। इसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ -16, बोइंग एफ / ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग -35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और रफाले शामिल थे। सभी विमानों के परीक्षण और उनकी कीमत के आधार पर भारतीय वायुसेना ने यूरोफाइटर और राफेल को शॉर्टलिस्ट किया। डलास ने 126 लड़ाकू विमानों को उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध हासिल किया, क्योंकि ये सबसे सस्ता मिल रहा था। कहा गया कि इसका रखरखाव भी आसान है।


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