विरोध की आवाज को लोकतंत्र में दबाया नहीं जा सकता : उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष की याचिका पर सुनवाई शुरू की, जिसमें उसने अध्यक्ष को कांग्रेस के 19 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोक दिया था। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्ब्ल ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय अध्यक्ष को विधायकों को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया को रोकने का निर्देश नहीं दे सकता। सी.पी जोशी का प्रतिनिधित्व कर रहे सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत अध्यक्ष की अयोग्यता की कार्यवाही की प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि अध्यक्ष से एक तय समय सीमा के भीतर अयोग्यता पर फैसला लेने के लिए कहा जा सकता है, लेकिन कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष से सचिन पायलट और कांग्रेस के 18 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता कार्यवाही शुरू करने की वजह पूछी। उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष की याचिका पर कहा कि यह कोई साधारण मामला नहीं है, ये विधायक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही स्वीकृति योग्य है या नहीं। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष की याचिका पर कहा कि विरोध की आवाज को लोकतंत्र में दबाया नहीं जा सकता है।

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