‘पिनाकी चंद्र घोष हो सकते हैं देश के पहले लोकपाल’

नयी दिल्ली : पिछले कई वर्षो से लोकपाल नियुक्‍ति की मांग को लेकर चल रही आंदोलन तथा इस संबंध में समय समय पर सरकार तथा विपक्ष के मध्‍य चली तनातनी के बीच लगता है सरकार लोकपाल के मुद्दे पर कुछ नरम हुई है। सरकार लोकसभा चुनावों से ठीक देश का पहला लोकपाल नियुक्त कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष देश के पहले लोकपाल हो सकते हैं। उल्‍लेखनीय है कि लोकपाल नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और विपक्ष के विरोध के बीच सरकार ने यह फैसला लिया है। जस्टिस घोष मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे और फिलहाल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य हैं। लोकपाल नियुक्ति की सेलेक्ट कमिटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्‍य न्‍यायाधीश या उनके द्वारा नामित जज, नेता विपक्ष, लोकसभा अध्यक्ष और एक न्‍यायाविद् होता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट में नेता विपक्ष नहीं होने की स्थिति में विपक्षी दल के नेता को विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर शामिल करने की बात सरकार ने कही थी। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकपाल कमिटी की बैठक में हिस्सा लेने से इनकार करते हुए इस संबंध में सरकार पर मनमानी का आरोप लगाया। हालांकि, तमाम विरोध के बाद आखिरकार मोदी सरकार ने चुनावों से पहले लोकपाल नियुक्त करने का फैसला किया है। जस्टिस घोष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज रह चुके हैं। वह आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे हैं। वह अपने फैसलों में मानवाधिकारों की रक्षा की बात बार-बार करते थे। जस्टिस घोष को मानवाधिकार कानूनों पर उनकी बेहतरीन समझ और विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है।

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