लद्दाख के गलवान घाटी में 2 किमी पीछे हटे चीनी सैनिक, अस्थायी ढांचे भी उखाड़े

नई दिल्ली : भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर मई से जारी विवाद में अब बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून को हुई हिंसा वाली जगह से 2 किलोमीटर पीछे हट गए हैं। चीन ने आधिकारिक बयान जारी करके कहा है कि वह तीन स्थानों से एलएसी से पीछे हटेगा।

कल की बातचीत का हुआ असर

कमांडर स्तर की बातचीत में 30 जून को बनी सहमति के अनुसार, चीनी सैनिक पीछे हटे थे या नहीं, इसे लेकर रविवार को एक सर्वे किया गया। अधिकारी का कहना है कि ”चीनी सैनिक हिंसक झड़प वाले स्थान से 2 किलोमीटर पीछे हट गए हैं और दोनों पक्ष अस्थायी ढांचे हटा रहे हैं।” बता दें कि रविवार को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री के बीच दो घंटे वीडीयो कांफ्रेंस के जरिये दो घंटे बातचीत हुई थी।

एकतरफा कार्रवाई नहीं करने पर बनी थी सहमति

विदेश मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सीमा मुद्दे पर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से रविवार को टेलीफोन पर बात की । मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग ने सीमावर्ती क्षेत्रों में हालिया घटनाक्रमों पर खुलकर बात की और व्यापक तौर पर विचारों का आदान-प्रदान किया । डोभाल और वांग इस बात पर सहमत हुए कि द्विपक्षीय संबंधों में विकास के लिए शांति और स्थिरता की बहाली आवश्यक है । डोभाल और वांग इस बात पर सहमत हुए कि शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा से सैनिकों का पूरी तरह पीछे हटना सुनिश्चित करना आवश्यक है। दोनों पक्षों को भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से कदम उठाना सुनिश्चित करना चाहिए। टेलीफोन पर हुई वार्ता में डोभाल और वांग ने पुन: दोहराया कि दोनों पक्षों को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का पूर्ण सम्मान करना चाहिए। टेलीफोन पर हुई वार्ता में डोभाल और वांग ने पुन: दोहराया कि एलएसी पर यथास्थिति को बदलने के लिए कोई एकतरफा कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इस बात पर सहमति बनी कि सीमा मुद्दे पर दो विशेष प्रतिनिधि अपनी चर्चा जारी रखेंगे

भारत और चीन के बाच करीब 2 महीने से चल रहा तनाव
मालूम हो कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच एलएसी पर करीब 2 महीने से तनाव के हालात बने हैं। 6 जून को हालांकि दोनों सेनाओं में पीछे हटने की सहमति बन थी, लेकिन चीन उसका क्रियान्वयन नहीं कर रहा है, जिसके कारण 15 जून को दोनों सेनाओं के बीच खूनी झड़प भी हो चुकी है। इस झड़प के बाद से दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बात हुई और 22 जून को सैन्य कमांडरों ने भी मैराथन बैठक की।
सेना को एलएसी पर आक्रामकता से जवाब देने का निर्देश
15 जून की घटना के बाद से भारत ने 3,488 किलोमीटर एलएसी पर अपने विशेष युद्ध बलों को तैनात कर दिया, जो चीनी सेना के पश्चिमी, मध्य या पूर्वी सेक्टरों में किसी भी प्रकार के हमले से निपट सकती है। वहीं शीर्ष सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना को चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा सीमा पार से किसी भी हरकत का आक्रामकता से एलएसी पर जवाब देने का निर्देश दिया है।

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