राष्ट्रपति ने राम मंदिर के निर्माण पर प्रसन्नता जताई

कहा-न्यायिक निर्णय को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर देशवासियों ने विश्व समुदाय के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया
नयी दिल्ली : राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शुक्रवार को 74वें स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि देशवासियों ने न्यायिक निर्णय को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए विश्व समुदाय के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया। 10 दिन पहले ही अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ है और इससे देशवासियों को गौरव की अनुभूति हुई है। देशवासियों ने लंबे समय तक धैर्य और संयम का परिचय दिया और देश की न्याय व्यवस्था में सदैव आस्था बनाये रखी। श्रीराम जन्मभूमि से सम्बंधित न्यायिक प्रकरण को भी समुचित न्याय-प्रक्रिया के अंतर्गत सुलझाया गया। सभी पक्षों और देशवासियों ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय को पूरे सम्मान के साथ स्वीकार किया और शांति, अहिंसा, प्रेम एवं सौहार्द के अपने जीवन मूल्यों को विश्व के समक्ष पुन: प्रस्तुत किया। जब भारत ने स्वाधीनता हासिल की थी, तो कुछ लोगों ने यह आशंका जताई थी कि लोकतंत्र का यह प्रयोग सफल नहीं होगा। वे भारतीय प्राचीन परंपराओं और बहुआयामी विविधता को राज्य-व्यवस्था के लोकतंत्रीकरण के मार्ग में बाधा समझते थे लेकिन हमने अपनी परम्पराओं और विविधता को सदैव अपनी ताकत समझकर उनका संवर्धन किया है।
चीन की तरफ इशारा, कहा-पड़ोसी ने विस्तारवादी नीति को बढ़ाने का दुस्साहस किया : अपने सम्बोधन में कोविंद ने कहा कि आज जब विश्व समुदाय के समक्ष आयी सबसे बड़ी चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है, तब हमारे पड़ोसी ने अपनी विस्तारवादी गतिविधियों को चालाकी से अंजाम देने का दुस्साहस किया। हमारे पास विश्व-समुदाय को देने के लिए बहुत कुछ है, विशेषकर बौद्धिक, आध्यात्मिक और विश्व-शांति के क्षेत्र में। मैं प्रार्थना करता हूं कि समस्त विश्व का कल्याण हो: सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः. सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दु:खभाग् भवेत्॥
गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन : आज जब विश्व समुदाय के समक्ष आयी सबसे बड़ी चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है, तब हमारे पड़ोसी ने अपनी विस्तारवादी गतिविधियों को चालाकी से अंजाम देने का दुस्साहस किया। सीमाओं की रक्षा करते हुए, हमारे बहादुर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। भारत माता के वे सपूत, राष्ट्र गौरव के लिए ही जिए और उसी के लिए मर मिटे। पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है। हमें अपने सशस्त्र बलों, पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों पर गर्व है, जो सीमाओं की रक्षा करते हैं और हमारी आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
वैश्विक महामारी में समझदारी व धैर्य सराहनीय : आप सभी देशवासी, इस वैश्विक महामारी का सामना करने में, जिस समझदारी और धैर्य का परिचय दे रहे हैं, उसकी सराहना पूरे विश्व में हो रही है। कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किये गये हैं। किसान बिना किसी बाधा के, देश में कहीं भी, अपनी उपज बेचकर उसका अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को नियामक प्रतिबंधों से मुक्त करने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ में संशोधन किया गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत की आत्मनिर्भरता का अर्थ स्वयं सक्षम होना : भारत की आत्मनिर्भरता का अर्थ स्वयं सक्षम होना है, दुनिया से अलगाव या दूरी बनाना नहीं। इसका अर्थ यह भी है कि भारत वैश्विक बाजार व्यवस्था में शामिल भी रहेगा और अपनी विशेष पहचान भी कायम रखेगा।
किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़ेगाः किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़े, इसके लिए जरूरतमन्द लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। इस अभियान से हर महीने, लगभग 80 करोड़ लोगों को राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है।
‘अम्फान’ के कारण हमारी चुनौतियां बढ़ीं : इसी दौरान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आये ‘अम्फान’ चक्रवात ने भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे हमारी चुनौतियां और बढ़ गयीं। इस आपदा के दौरान, जान-माल की क्षति को कम करने में आपदा प्रबंधन दलों, केंद्र और राज्यों की एजेंसियों तथा सजग नागरिकों के एकजुट प्रयासों से काफी मदद मिली।
राष्ट्र स्वास्थ्य-कर्मियों का ऋणी : राष्ट्र उन सभी डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य-कर्मियों का ऋणी है, जो कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं। ये हमारे राष्ट्र के आदर्श सेवा-योद्धा हैं। इन कोरोना-योद्धाओं की जितनी भी सराहना की जाये, वह कम है। ये सभी योद्धा अपने कर्तव्य की सीमाओं से ऊपर उठकर, लोगों की जान बचाते हैं और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। इन प्रयासों से हमने वैश्विक महामारी की विकरालता पर नियंत्रण रखने और बहुत बड़ी संख्‍या में लोगों के जीवन की रक्षा करने में सफलता प्राप्त की है। यह पूरे विश्‍व के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण है। यह बहुत आश्वस्त करने वाली बात है कि इस चुनौती का सामना करने के लिए, केंद्र सरकार ने पूर्वानुमान करते हुए, समय रहते, प्रभावी कदम उठा लिए थे।
स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों में धूम-धाम नहीं होगी : इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों में हमेशा की तरह धूम-धाम नहीं होगी। इसका कारण स्पष्ट है। पूरी दुनिया एक ऐसे घातक वायरस से जूझ रही है जिसने जन-जीवन को भारी क्षति पहुंचाई है और हर प्रकार की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की है।
स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञ : हम अपने स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं। उनके बलिदान के बल पर ही, हम सब, आज एक स्वाधीन देश के निवासी हैं।

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