भारत के लिए क्यो जरूरी है लड़ाकू विमान राफेल, जानिए

नई दिल्लीः पुलवामा हमले के बदले की कार्रवाई व भारत में हमला करने आए पाकिस्तान के एफ-16 विमानों को भारतीय फाइटर प्लेन द्वारा खदेड़ने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 मार्च को राफेल फाइटर प्लेन का जिक्र करते हुए कहा क‌ि आज राफेल लड़ाकू विमान की कमी महसूस हो रही है। यदि राफेल विमान हमारे पास होता तो परिणाम इससे कुछ अलग होता। आखिर राफेल विमान में क्या खासियत है, जो इसे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ फाइटर प्लेनों में शुमार किया जाता है।
गौरतलब है कि राफेल सौदे को लेकर सरकार और विपक्ष में तकरार बरकरार है।

यह है विशेषता
फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित राफेल दो इंजन वाला मध्यम मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) है। राफेल लड़ाकू विमानों को ‘ओमनिरोल’ विमानों की श्रेणी में रखा गया है, जो युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने की काबिलियत रखते हैं। राफेल की खूबियों की बात करें तो यह हवाई हमला, जमीनी में सेना की सहायता करना, दुश्मन पर बड़ा हमला करना और परमाणु हथियारों के खिलाफ भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

राफेल खरीदने की वजह
राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया में टेंडर जारी किया गया। जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माता कंपनियों ने अपने विमान के बारे में पेशकश की। वायुसेना ने इनमें से छह बड़ी विमान कंपनियों को छांटा। इसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ-16, बोइंग एफ / ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग-35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और डसॉल्ट एविएशन की राफेल विमान थे। वायुसेना ने इन छह विमानों के परीक्षण और उनकी कीमत को ध्यान में रखने हुए यूरोफाइटर और राफेल को छांटा। डसाल्ट ने 126 लड़ाकू विमानों को उपलब्ध कराने के लिए अनुबंध हासिल किया, क्योंकि ये सबसे कम कीमत पर मिल रहा था। बताया गया कि इसका रखरखाव भी आसान है।
2001 में शुरू हुई खरीद प्रक्रिया
भारतीय वायु सेना ने साल 2001 में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की मांग की थी। इस सौदे की शुरुआत 10.2 अरब डॉलर (5,4000 करोड़ रुपये) से होनी अपेक्षित थी। 126 विमानों में 18 विमानों को तुरंत लेने और बाकी की तकनीक भारत को सौंपे जाने की बात थी। लेकिन साल 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में नई शर्तों और कीमत के साथ सौदे में बदलाव किया।
राफेल सौदा भारत और फ्रांस के लिए क्यों अहम
मौजूदा समय में फ्रांस, मिस्र और कतर राफेल लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल कर रहे हैं। डसॉल्ट एविएशन कंपनी की वित्तीय स्थिति खस्ताहाल है। भारत से सौदे के बाद कंपनी को अपने राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने की उम्मीद थी। भारत ने रूस के मिग की बजाय फ्रांस के डसाल्ट को खरीदने का फैसला किया। भारत ने अमेरिका के लॉकहीड को भी तवज्जो नहीं दी।
मोदी सरकार में क्या हुआ
अप्रैल 2015 में नरेंद्र मोदी ने पेरिस का दौरा किया। तभी 36 राफेल खरीदने का निर्णय लिया गया। सरकार ने इस सौदे पर साल 2016 में दस्तखत किए। जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद ने जनवरी में भारत का दौरा किया तब राफेल जेट विमानों की खरीद के 7.8 अरब डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर हुए।

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