राज्यसभा का बजट सत्र आठ दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

नयी दिल्ली : कोविड-19 महामारी के साये में आयोजित राज्यसभा का ‘ऐतिहासिक’ मानसून सत्र बुधवार को अपने निर्धारित समय से करीब आठ दिन पहले ही अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। छोटी अवधि के बावजूद सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया। सदन में हंगामे के कारण आठ विपक्षी सदस्यों को रविवार को शेष सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। सभापति एम वेंकैया नायडू ने सत्र को स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में कहा कि यह सत्र ऐतिहासिक रहा क्योंकि इस दौरान उच्च सदन के सदस्यों को बैठने की नयी व्यवस्था के तहत पांच अन्य स्थानों पर बैठाया गया। उच्च सदन के इतिहास में ऐसा पहले नहीं हुआ। सदन ने लगातार दस दिनों तक काम किया व शनिवार और रविवार को सदन में अवकाश नहीं रहा। सत्र के दौरान 25 विधेयकों को पारित किया गया या लौटा दिया गया। इसी के साथ छह विधेयकों को पेश किया गया। सत्र के दौरान पारित किये गये विधेयकों में कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक, महामारी संशोधन विधेयक, विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक, जम्मू कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक शामिल हैं। इस सत्र के दौरान 104.47 प्रतिशत कामकाज हुआ।
इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर व्यवधान के कारण जहां सदन के कामकाज में तीन घंटों का नुकसान हुआ, वहीं सदन ने तीन घंटे 26 मिनट अतिरिक्त बैठकर कामकाज किया। पिछले चार सत्रों के दौरान उच्च सदन में कामकाज का कुल प्रतिशत 96.13 फीसदी रहा है। हालांकि पिछले दो दिनों से सदन के कामकाज में कुछ विपक्षी दलों के सदस्यों द्वारा भाग नहीं लिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण रहा। नायडू ने कहा कि राज्यसभा के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि उपसभापति को हटाये जाने का नोटिस दिया गया। उन्होंने इसे खारिज कर दिया क्योंकि वह नियमों के अनुरूप नहीं था। इसके बाद सदन में हुई घटनाएं ‘पीड़ादायक’ हैं। अनुपस्थित सदस्यों से अनुरोध है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं हो और सदन की गरिमा बनी रहे। मालूम हो कि रविवार को कृषि संबंधी दो विधेयकों के पारित होने के दौरान हंगामे को लेकर सोमवार को आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, सैयद नजीर हुसैन और रिपुन बोरा, आप के संजय सिंह, माकपा के केके रागेश और इलामारम करीम शामिल हैं। इसी सत्र के दौरान राजग के प्रत्याशी हरिवंश ध्वनिमत से दोबारा राज्यसभा के उपसभापति चुने गये।
नायडू ने कहा कि इस सत्र को बुलाये जाने की संवैधानिक बाध्यता भी थी। साथ ही उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जब बात हुई तो उन्होंने कहा कि जब सभी क्षेत्रों के लोग काम कर रहे हैं तो सांसदों को जो जिम्मेदारी दी गयी है, उसे पूरा किया जाना चाहिए।

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