यौन शोषण के आरोप के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने किया विशेष पीठ का गठन, कहा- न्यायपालिका खतरे में

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने ऊपर लगे यौन शोषण के आरोप को खारिज किया है। उन्होंने कहा, ‘मैं इन आरोपों का जवाब नहीं देना चाहता हूं।’ सीजेआई रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका खतरे में है। उन्होंने कहा अगले हफ्ते कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई होनी है इसीलिए जानबूझकर ऐसे आरोप लगाए गए है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा क‌ि जिस महिला ने यह आरोप लगाया है, वह 4 दिन जेल में थी। महिला ने किसी शख्स को सुप्रीम कोर्ट में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था और पैसे लिए थे। सीजेआई ने कहा कि जब महिला ने सर्विस ज्वॉइन किया था तब भी इसके ऊपर मामला दर्ज था। इतना ही नहीं महिला के पति पर भी दो मामले दर्ज हैं।

सुप्रीम कोर्ट की एक स्पेशल बेंच ने मामले की सुनवाई की
दरअसल एक महिला द्वारा सीजेआई पर यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट की एक स्पेशल बेंच ने मामले की सुनवाई की । बता दें कि इस पीठ का गठन उस वक्त किया गया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगने के संबंध में अधिकारियों को बताया। इस दौरान सीजेआई ने कहा कि क्या चीफ जस्टिस के 20 सालों के कार्यकाल का यही ईनाम है? 20 सालों की सेवा के बाद मेरे खाते में सिर्फ 680000 रुपये हैं। चाहे तो कोई भी मेरा खाता चेक कर सकता है।
हालांकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई वाली बेंच ने फिलहाल इस पर कोई आदेश पारित नहीं किया है।

न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता: गोगोई

सीजेआई ने कहा कि, मेरे चपरासी तक के पास मुझसे भी ज्यादा पैसे हैं। रंजन गोगोई ने कहा कि न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता है। कुछ लोग सीजेआई के ऑफिस को निष्क्रिय करना चाहते हैं। लोग पैसे के मामले में मुझ पर ऊंगली नहीं उठा सकते थे इसलिए इस तरह का आरोप लगाया है। सीजेआई ने कहा कि मैं देश के लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि मैं महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करूंगा। जिन्होंने मुझपर आरोप लगाए हैं, वे जेल में थे और अब बाहर हैं। इसके पीछे किसी एक शख्स का नहीं है, बल्कि कई लोगों का हाथ है।


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