युवाओं को इतिहास के यथार्थ से परिचित कराने की आवश्यकता : उपराष्ट्रपति

नयी दिल्ली : उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने इतिहास के सम्पूर्ण प्रामाणिक यथार्थ को समग्रता में प्रकाश में लाने की आवश्यकता बल देते हुए बुधवार को कहा कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के क्रान्तिकारियों के अमर बलिदानों को स्कूली पाठयपुस्तकों में शामिल किया जाना चाहिए। नायडू ने यहां अपने उपराष्ट्रपति निवास पर आयोजित समारोह में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आई एन ए ट्रस्ट के सहायक सदस्य डॉ कल्याण कुमार डे की पुस्तक ‘नेताजी इंडियाज इंडिपेंडेंस एण्ड ब्रिटिश आर्काइव्स’ का लोकार्पण करते हुए कहा कि पुस्तक में स्वाधीनता आन्दोलन के दौरान नेताजी की महत्वपूर्ण भूमिका से सम्बन्धित प्रमाणिक दस्तावेजों का संकलन है जिससे युवा पीढ़ी को परिचित होना चाहिए।

अमर बलिदान की घटनाओं को स्कूली पाठ्यपुस्तकों में  करें शामिल

उन्होंने कहा देश के विभिन्न क्षेत्रों के क्रान्तिकारियों के अमर बलिदान की घटनाओं को स्कूली पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमारे स्वाधीनता आंदोलन के दौरान नेताजी का साहसी और ओजस्वी नेतृत्व युवाओं के लिए अनुकरणीय प्रेरणा का ह्मोत था। उन्होंने कहा कि पुस्तक में शामिल दस्तावेजों से प्रमाणित होता है कि नेता जी के आजाद हिन्द फौज के गठन तथा जनता में उसकी बढ़ती लोकप्रियता से अंग्रेज़ घबरा गए थे और भारत की स्वतंत्रता में इसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही।

आत्मनिर्भर भारत कारोबारी बाधा या संरक्षणवाद को नहीं करता प्रोत्साहित

उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया पहले जैसी नहीं रहेगी, ऐसे में भारत जैसे देशों के लिये सही अर्थो में आत्मनिर्भर बनकर कठिन परिस्थितियों से मुकाबला करने में समर्थ अर्थव्यवस्था का निर्माण करने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘आत्मनिर्भर भारत कारोबारी बाधा खड़ा करने या संरक्षणवाद को प्रोत्साहित करने की बात नहीं करता है बल्कि भारत की अंतर्निहित ताकत को पहचानने और विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर देता है।’
समर्थ अर्थव्यवस्था का निर्माण करने की जरूरत
नायडू ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया पहले जैसी नहीं रहेगी। ऐसे में भारत जैसे देशों के लिये सही अर्थो में आत्मनिर्भर बनकर कठिन परिस्थितियों से मुकाबला करने में समर्थ अर्थव्यवस्था का निर्माण करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘ मुझे इस बात की खुशी है कि सरकार ने आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने के उपायों के तहत हाल ही में रक्षा क्षेत्र के 101 उत्पादों पर आयात रोक लगाने की घोषणा की।’

हम सब सबसे पहले भारतीय
नायडू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जिक्र करते हुए कहा, ‘हमारी युवा पीढ़ी को भारत के इतिहास के प्रति जागरूक होना चाहिए। देशभर से स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और पराक्रम की कहानियों को पाठक्रम में रेखांकित किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि नेताजी का दृढ़ विश्वास था कि हम सब सबसे पहले भारतीय हैं, धर्म, जाति, क्षेत्रीय और भाषाई पहचानें बाद में आती हैं।

महान राष्ट्र अपनी नियति स्वयं लिखते हैं
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘ हमारे स्वाधीनता आंदोलन के दौरान नेताजी का साहसी और ओजस्वी नेतृत्व युवाओं के लिए अनुकरणीय और प्रेरणा का स्रोत है। नेताजी का विश्वास था कि महान राष्ट्र अपनी नियति स्वयं लिखते हैं। उन्होंने लोगों में भी यह विश्वास जगाया।’ उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस भी है और इस अवसर पर वह युवाओं से नये भारत के निर्माण के लिये नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील करते हैं।

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