मोदी-शाह ने इमरजेंसी विरोधियों को किया सलाम, ममता ने कसा तंज,कही ये बात…

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 44 साल पहले आज के ही दिन लगाई गई इमरजेंसी के दिनों को याद करते हुए इसके विरोध में खड़े हुए सेनानियों को सलाम किया है। मोदी ने सन 1975 में लगाई गई इमरजेंसी के विरोधियों को मंगलवार को श्रद्धांजलि भी दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के कारण अधिनायकवाद पर लोकतंत्र की जीत हुई थी। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र इमरजेंसी के दिन को याद करते हुए सरकार पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि देश 5 वर्षों से सुपर इमरजेंसी का सामना कर रहा है।

नेताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया था

दरअसल, 25 जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी की घोषणा की थी। इस दौरान कई नेताओं ने इसका पुरजोर विरोध किया था। विरोध करने वाले नेताओं की आवाज को दबाने के लिए इंदिरा सरकार ने उन्हें जेलों में बंद कर दिया था। हालांकि बाद में यह इंदिरा सरकार की हार का कारण बनी।

विरोध करने वाले महान लोगों को सलाम

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘भारत बेहद कड़ाई से और निडर होकर आपातकाल का विरोध करने वाले महान लोगों को सलाम करता है। अधिनायकवादी सोच पर भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत हुई।’’ वहीं केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इमरजेंसी के दिनों को याद किया कि उन दिनों कैसे अखबारों को बंद कर दिया गया था और देश के नागरिकों से उनके मौलिक अधिकार छीन लिए गए थे। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘लाखों देशभक्तों ने देश में लोकतंत्र की पुन: बहाली के लिए कष्ट उठाए। मैं उन सभी सिपाहियों को सलाम करता हूं।’’

ममता का मोदी सरकार पर तंज

ममता ने भी इमरजेंसी के दिन को याद करते हुए ट्वीट किया, “आज 1975 में लगाई गई इमरजेंसी की वर्षगांठ है। पिछले 5 वर्षो से देश सुपर इमरजेंसी से गुजर रहा है। हमें इतिहास से देश की लोकतांत्रिक संस्‍थाओं की प्रतिष्ठा के लिए लड़ना सीखना चाहिए।” मालूम हो कि ममता बनर्जी लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ तंज कसती रहीं हैं। गत दिनों लोकसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद बंगाल में हुई हिंसा के लिए भी वे भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहरा चुकीं हैं। इतना ही नहीं वे प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह और नीति आयोग के बैठकों में भी शामिल नहीं हुईं थीं।

इमरजेंसी को बताया काला धब्बा

भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने इमरजेंसी को लोकतंत्र के लिए काला धब्बा बताते हुए ट्वीट किया है, ‘‘1975 में, आज ही के दिन, कांग्रेस पार्टी ने सत्ता में बने रहने के लिए लोकतंत्र की हत्या कर दी थी। कृतज्ञ राष्ट्र इमरजेंसी के विरोध में आंदोलन चलाने वाले भारतीय जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के हजारों कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देता है।’’ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्विटर के माध्यम से अपने विचार रखें हैं कि कैसे आपातकात भारत के इतिहास का काला अध्याय है। उन्होंने लिखा है, ‘‘25 जून, 1975 को आपातकाल की घोषणा और उसके बाद की घटनाएं भारतीय इतिहास के सबसे खराब अध्यायों में से एक है। आज के दिन, हम भारतीयों को अपनी संस्थाओं और संविधान की संप्रभुता बनाए रखने के महत्व को समझना चाहिए।’’

गौरतलब है कि देश में इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 25 जून, 1975 से लेकर 21 मार्च, 1977 तक इमरजेंसी लागू ‌थी।

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