मैंने हिन्दी थोपने की बात कभी नहीं की : शाह

दूसरी भाषा के तौर पर इसके इस्तेमाल की वकालत की
रांची : हिंदी पर अपने बयान से उठे विवाद को शांत करने का प्रयास करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उन्होंने देश में कहीं भी हिंदी थोपने की बात कभी नहीं की, बल्कि दूसरी भाषा के तौर पर इसके इस्तेमाल की वकालत की। वे लगातार क्षेत्रीय भाषाओं को मजबूत करने की वकालत कर रहे हैं। यहां एक अखबार द्वारा आयोजित समारोह में उन्होंने कहा कि मैं भी एक गैर-हिंदी भाषी राज्य गुजरात से आता हूं, जहां गुजराती भाषा बोली जाती है, ना कि हिंदी। मेरे भाषण को तसल्ली से सुना जाना चाहिए। अगर किसी को राजनीति करनी है तो यह उसकी मर्जी है। मैंने बार-बार कहा कि भारतीय भाषाओं को मजबूत किया जाना चाहिए और लोगों को भारतीय भाषाओं की आवश्यकता को समझना चाहिए। किसी बच्चे का उचित मानसिक विकास तभी संभव है, जब वह मातृभाषा में पढ़ाई करता है। मातृभाषा से मतलब हिंदी से नहीं है। यह राज्य विशेष की भाषा है, जैसे मेरे राज्य में गुजराती है, लेकिन देश में एक भाषा होनी चाहिए कि यदि कोई दूसरी भाषा सीखना चाहे तो यह हिंदी होनी चाहिए। मैंने केवल अनुरोध किया था, इसमें क्या गलत है।

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