मिथिला की बेटी मधु माधवी का प्रतिष्ठित जेम्स वॉट मेडल के लिए हुआ चयन

दरभंगा : बिहार के मिथिलांचल की बेटी मधु माधवी का प्रतिष्ठित जेम्स वॉट पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। लंदन के प्रसिद्ध रिसर्च जनरल ‘एनर्जी’ में प्रकाशित एक आलेख पर मिथिला की बेटी का प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयन किया गया है। लंदन के आई.सी ई पब्लिशिंग हाउस ने शोध निबंध के लिए उनका चयन इस पुरस्कार के लिए किया है। रिसर्च जनरल में मधु का अवार्ड विनिंग पेपर ‘कोल इन द ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी, ए क्लाइमेट ऑफ चेंज एंड अनसर्टेंटी’ शीर्षक से प्रकाशित हुआ है।
अक्टूबर माह के बाद मिलेगा अवार्ड
मधु माधवी ने अपना शोध कार्य कैंब्रिज ओपन यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर डॉक्टरल ट्रेनिंग के अंतर्गत किया है। ओपन यूनिवर्सिटी द्वारा यह शोध कार्य वित्त संपोषित है। आई सी ई पब्लिशिंग हाउस, लंदन हर साल किसी एक उत्कृष्ट (शोध पत्र) रिसर्च-आर्टिकल के लिए जेम्स वॉट अवार्ड से सम्मानित करता है। मधु का चयन साल 2020 के लिए हुआ है। यह अवार्ड अक्टूबर माह के बाद लंदन में दिया जाएगा।
जलवायु परिवर्तन वैश्विक चुनौती
मधु दरभंगा जिले के हायाघाट प्रखंड के विशनपुर गांव की निवासी पूर्व विधान पार्षद प्रो विनोद कुमार चौधरी और महारानी कल्याणी कॉलेज की समाज शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ सरोज चौधरी की ज्येष्ठ पुत्री है। पिछले वर्ष मधु माधवी यूनाईटेड किंगडम (यू के.) सिविल सर्विसेज की परीक्षा में सफल हुई और फिलहाल लंदन में ही सेवारत हैं। जलवायु परिवर्तन आज वैश्विक चुनौती बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखकर मधु माधवी ने अपना 18 पृष्ठों का आलेख लिखा और प्रकाशन के लिए आई सी ई पब्लिकेशन को 30 अप्रैल 2018 को ही भेजा था। प्रकाशन संस्थान ने इसे 27 मार्च 2019 को प्रकाशित करने की सहमति दी थी। इस आलेख का प्रकाशन 03 जुलाई 2019 के ऑनलाइन अंक में हुआ है। लंदन की डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस एनर्जी एंड इंडस्ट्रियल स्टेट स्ट्रेटजी में सीनियर पॉलिसी ऑफिसर के पद पर कार्यरत मधु माधवी की प्रारंभिक शिक्षा दरभंगा से हुई है।

शेयर करें

मुख्य समाचार

बंगाल में तीसरे दिन भी कोरोना के 800 से ज्यादा मामले, 25 की हुई मौत

कोलकाता : वेस्ट बंगाल कोविड-19 हेल्थ बुलेटिन के अनुसार पश्चिम बंगाल में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 850 नये मामले आये है आगे पढ़ें »

कोरोना की वजह से 9वीं-12वीं के पाठ्यक्रम 30 फीसदी घटे

नयी दिल्ली : कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच स्कूलों के ना खुल पाने के कारण शिक्षा व्यवस्था पर असर और कक्षाओं के समय में आगे पढ़ें »

ऊपर