माेदी मंत्रिमंडल 2 में भारी फेरबदल की संभावना

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाेकसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही भाजपा मुख्यालय में हुई मंत्रिपरिषद की फेयरवेल बैठक में ये संकेत दे दिए थे कि नई कैबिनेट के गठन में 50-60 फीसदी बदलाव हाेंगे। गृह, वित्त, रक्षा और विदेश मंत्री के अलावा भाजपा संगठन के अध्यक्ष और लोकसभा स्पीकर के ये 6 पद पर माेदी के साथ काैन आएंगे ये सभी जानना चाहते है।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज स्वास्थ्य कारणों से शायद ही इन शीर्ष चार पदों में शामिल हों सकें। सुषमा स्वराज तो अभी किसी सदन की सदस्य भी नहीं हैं। वहीं, सुमित्रा महाजन के लाेकसभा चुनाव नहीं लड़ने के कारण लोकसभा स्पीकर का पद भी खाली होना तय है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नाम की चर्चा गृहमंत्री या वित्तमंत्री के लिए हो रही है, लेकिन इस बात की संभावना कम है कि वे सरकार में शामिल हों। शाह अभी कैबिनेट में नहीं जाएं, क्योंकि पार्टी संविधान के मुताबिक अभी उन्हें 3 साल का एक और कार्यकाल मिल सकता है। संघ और पार्टी स्तर पर यह चर्चा चल रही हैं। अभी माेदी के बाद शाह ही सबसे पावरफुल नेता के रुप में माने जा रहे है। मंत्री-मुख्यमंत्री उनके मातहत ही रहते हैं। वहीं, लोकसभा स्पीकर के लिए संतोष गंगवार मोदी की पसंद बन सकते हैं। अगर अमित शाह मोदी कैबिनेट में जाते हैं तो भाजपा अध्यक्ष के लिए एक ऐसे चेहरे की तलाश हो रही है जिनका मोदी-शाह से समन्वय बेहतर हो क्योंकि सरकार और संगठन की परोक्ष बागडोर भी इन दोनों के हाथ में ही रहनी है। जैसा कि वाजपेयी-आडवाणी के समय जब एनडीए सत्ता में थी तब बंगारू लक्ष्मण, जनाकृष्णमूर्ति और वेंकैया नायडू जैसे चेहरों को भाजपा अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी।

6 पदों के लिए इन 9 वरिष्ठ नेताओं में से हो सकता है चुनाव
गृहमंत्री के लिए राजनाथ या अमित शाह

राजनाथ सिंह अपनी वरिष्ठता के कारण माेदी मंत्रालय में बने रह सकते हैं। राजनाथ की संघ के शीर्ष नेताओं से अनौपचारिक चर्चा भी हो चुकी है। इस विभाग के लिए अमित शाह के नाम की भी चर्चा है, लेकिन शाह काे ऐसा मंत्रालय पसंद है जाे सीधे जनता से जुड़ा हो। शाह काे करीब से जानने वाले बताते हैं कि शाह जब गुजरात में गृह राज्यमंत्री थे तब भी उन्होंने पीएम मोदी से कहा था कि उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय दिया जाए।
वित्तमंत्री के लिए गाेयल, शाह, गडकरी
वित्तमंत्री के लिए पीयूष गोयल प्रबल दावेदार नजर आ रहे हैं। उन्होंने अंतरिम बजट भी पेश किया था। वित्त विभाग संभालते रहे हैं। पीयूष गोयल को मोदी-शाह का सबसे भरोसेमंद व्यक्ति माना जाता है। चर्चा यह भी है कि खुद अमित शाह वित्त मंत्रालय का रुख कर सकते हैं, क्योंकि सरकार की प्राथमिकता अब आर्थिक मोर्चों पर सफलता पाना है। इसके लिए वे जिम्मेदार नाम हैं। इस विभाग के लिए नितिन गडकरी के नाम की भी चर्चा है।
रक्षा मंत्री के लिए शाह व राजनाथ
रक्षा विभाग के लिए अमित शाह और राजनाथ सिंह के नाम पर विचार-विमर्श हो रहा है। राजनाथ सिंह गृह मंत्री के रूप में आंतरिक सुरक्षा की बारीकियां समझ चुके हैं। चूंकि उनको सीसीएस (सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी) में बनाए रखना है, इसलिए गृह विभाग उनसे नहीं लिया जा सकता। वहीं, रक्षा विभाग में आने की वजह से शाह को संगठन के काम पर ध्यान देने का समय मिलेगा, जो इस समय उनके लिए बेहद जरूरी है।
विदेश मंत्री के लिए सीतारमण व स्मृति ईरानी
माेदी के मंत्रीमंडल में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण नई विदेश मंत्री हो सकती हैं। सीतारमण काे बेहतरीन अंग्रेजी और पड़ोसी मामलों की समझ हैं। मंत्रीमंडल के शीर्ष 4 पदों में एक महिला की अनिवार्यता को मोदी सरकार बनाए रखना चाहती हैं, इसलिए सीतारमण पहली पसंद हो सकती हैं। हालांकि सीतारमण के अलावा नवनिर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी के नाम पर भी चर्चा हाे रही है। वाकपटुता में माहिर स्मृति मानव संसाधन, सूचना प्रसारण और अभी टेक्सटाइल संभालते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुकी हैं।
लोकसभा अध्यक्ष के लिए संतोष गंगवार व राजनाथ सिंह
लाेकसभा अध्यक्ष पद के लिए राजनाथ सिंह के नाम पर भी चर्चा चल रही हैं। लेकिन आठ बार के यूपी के बरेली से सांसद बन चुके संतोष गंगवार सबसे मुफीद चेहरा माने जा रहे हैं। गंगवार इससे पहले वाजपेयी सरकार तथा मोदी सरकार में मंत्री रहे और विपक्ष में रहते हुए लोकसभा में मुख्य सचेतक भी रहे हैं। व्यवहार से सहज, सौम्य और कम बोलना उनकी व्यवहार कुशलता का अहम हिस्सा है। सबसे वरिष्ठ होने के बावजूद भी वे अभी स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए भूपेंद्र यादव व जेपी नड्‌डा
राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव का समन्वय मोदी-शाह के साथ बेहतर है। वाजपेयी सरकार के समय संगठन की बागडोर दक्षिण भारतीय नेताओं को सौंपने से संगठन में स्थिरता आ गई थी और पार्टी हार गई थी। इस बार हिंदी पट्‌टी से अध्यक्ष बनाने की रणनीति है। जगत प्रकाश नड्‌डा का भी नाम प्रमुखता से चर्चा में है। पिछली बार भी वे दौड़ में थे लेकिन शाह अध्यक्ष बन गए। यूपी के प्रभारी के रूप में इस बार पार्टी को बेहतरीन सफलता दिलाई है।

 

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