मणिपुर में कांग्रेस के छह विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता और पार्टी से दिया इस्तीफा

इम्फाल : मणिपुर में कांग्रेस के छह विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया और मंगलवार को पार्टी भी छोड़ दी। इन छह विधायकों ने अपने इस्तीफे सोमवार रात को विधानसभाध्यक्ष यमनाम खेमचंद सिंह को सौंपे थे और इन लोगों ने यहां कांग्रेस कार्यालय को पार्टी छोड़ने के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया। मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव, हरेश्वर गोस्वामी ने कहा, ‘मणिपुर के छह कांग्रेस विधायकों ने पार्टी कार्यालय को अपना त्याग पत्र सौंप दिया है।’ ये सभी विधायक कांग्रेस के उन आठ विधायकों में शामिल हैं, जो पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए सोमवार को विधानसभा के एक दिवसीय सत्र में शामिल नहीं हुए थे। इस सत्र में भाजपा नीत एन बीरेन सिंह सरकार ने विश्वास मत हासिल कर लिया था। विधानसभा की सदस्यता के साथ ही पार्टी छोड़ने वालों में ओकराम हेनरी सिंह, ओइनम लुखोई, मोहम्मद अब्दुल नासिर, पाओनाम ब्रोजन, नगमथांग हाओकिप और गिनसुआनहाऊ शामिल हैं। हेनरी सिंह कांग्रेस विधायक दल के नेता ओ इबोबी सिंह के भतीजे हैं।

पांच का इस्तीफा स्वीकार कर लिया

मणिपुर विधानसभा सचिव एम रमानी देवी ने बताया कि विधानसभाध्यक्ष ने उनमें से पांच का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उनकी विधानसभा सीटें रिक्त घोषित कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि छठे विधायक पी ब्रोजन की अयोग्यता का मामला पहले से ही स्पीकर के ट्रिब्यूनल के पास लंबित है, जिसपर 14 अगस्त को विचार किया जाएगा। इस्तीफे के कारण का उल्लेख करते हुए हेनरी सिंह ने कहा कि इन सभी विधायकों ने इबोबी सिंह के नेतृत्व में विश्वास की कमी का हवाला दिया है, जिनकी वजह से कांग्रेस राज्य में 2017 में चुनाव के बाद अकेली सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बावजूद सरकार बनाने में विफल रही थी। सदन के दिनभर के विशेष सत्र में हिस्सा नहीं लेने वाले आठ विधायकों में से बाकी दो में मोहम्मद फजुर रहमान और वाई हाओकिप शामिल हैं।

घर पर पृथक-वास में

विधानसभाध्यक्ष ने सोमवार को सदन में कहा था कि दोनों ने सूचित किया है कि वे घर पर पृथक-वास में हैं। सूत्रों ने कहा कि वबागई विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले फज़ुर रहमान कोविड-19 से संक्रमित पाये गए हैं और उन्हें मंगलवार को यहां एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। हेनरी सिंह ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफे प्राप्त होने के बाद उन्हें विधानसभा सत्र के बाद सोमवार रात में बुलाया था ताकि वह उसकी पुष्टि कर सकें।

विधानसभा के चार सदस्य अयोग्य ठहराए गए थे

भले ही विश्वास मत में सरकार की जीत पहले से ही निश्चित थी, लेकिन बेहद जरूरी सत्र में कांग्रेस के आठ विधायकों की गैरमौजूदगी ने मुख्यमंत्री के चतुराई भरे राजनीतिक दांव को दर्शाया है। 60 सदस्यों वाली विधानसभा में अध्यक्ष समेत मौजूदा विधायकों की संख्या 53 है। अध्यक्ष बराबर मत होने पर अपने मत का इस्तेमाल कर सकते थे। इससे पहले विधानसभा के चार सदस्य अयोग्य ठहराए गए थे और भाजपा के तीन सदस्यों ने कुछ समय पहले इस्तीफा दे दिया था। सत्तारूढ़ गठबंधन के पास अध्यक्ष समेत 29 विधायक जबकि कांग्रेस के पास 24 विधायक थे। इनमें से कांग्रेस के आठ विधायक सत्र में शामिल नहीं हुए। इस जीत के साथ ही बीरेन सिंह की सत्तारूढ़ गठबंधन पर पकड़ और मजबूत हो गई है, जिसमें भाजपा के 18 विधायक, एनपीपी और एनपीएफ के चार-चार, तृणमूल कांग्रेस, लोक जनशक्ति पार्टी के एक-एक और एक निर्दलीय शामिल हैं।

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