मंत्री बनना नहीं चाहते जेटली, मोदी को लिखा पत्र

अरुण जेटली की हालत खराब

नयी दिल्ली : देश के निवर्तमान वित्त मंत्री अरुण जेटली नई सरकार में मंत्री बनना नहीं चाहते हैं। उन्होंने बुधवार को सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए निवर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में जेटली ने मंत्री नहीं बनने की इच्छा के पीछे अपने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया है।

पत्र को सोशल मीडिया पर भी डाला
जेटली ने केन्द्र में बनने वाली नई सरकार में अपनी भूमिका को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही उहापोह को समाप्त कर दिया। उन्होंने खराब स्वास्थ्य के चलते नयी सरकार में मंत्री बनने से इनकार किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजा गया अपना पत्र ट्विटर और फेसबुक पर भी डाला है।  जेटली को पिछले सप्ताह जांच एवं इलाज के लिये एम्स में भर्ती होना पड़ा था। उन्हें चुनाव परिणाम की घोषणा वाले दिन अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था। यही वजह रही कि जेटली उस दिन शाम में भाजपा मुख्यालय में आयोजित जीत के जश्न समारोह में शामिल नहीं हो पाये थे।

नई सरकार में कोई जिम्मेदारी न दी जाए
जेटली कहा कि हाल ही में संपन्न चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत मिलने के तुरंत बाद उन्होंने अपनी अघोषित बीमारी का इलाज के लिये समय देने के बारे में मोदी को सूचित किया था। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपसे औपचारिक रूप से यह निवेदन करने के लिए लिख रहा हूं कि मुझे अपने लिये, अपनी चिकित्सा के लिये और अपने स्वास्थ्य के लिये कुछ समय चाहिए और इस कारण मुझे अभी नई सरकार में कोई जिम्मेदारी न दी जाए।’’
कुछ समय जिम्मेदारी से दूर रहना चाहूंगा
जेटली ने पत्र में लिखा कि पिछले 18 महीनों में उन्होंने कुछ गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे चिकित्सकों ने उनमें से अधिकांश चुनौतियों से मुझे सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। जब चुनाव प्रचार खत्म हो चुका था और आप केदारनाथ जा रहे थे, तो मैंने आप से जुबानी कहा था कि चुनाव प्रचार के दौरान मुझे जो जिम्मेदारियां दी गयी थीं, मैं उन्हें पूरा करने में यद्यपि समर्थ रहा लेकिन भविष्य में कुछ समय के लिए मैं जिम्मेदारी से दूर रहना चाहूंगा। इससे मैं अपने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा पर ध्यान दे सकूंगा।’’
सरकार में काम करना मेरे लिये बड़े गर्व की बात
उन्होंने कहा, ‘‘आपके नेतृत्व वाली सरकार में पिछले पांच साल रह कर काम करना मेरे लिये बड़े गर्व की बात है और यह एक शिक्षाप्रद अनुभव रहा है। इससे पहले भी पार्टी ने मुझे पहली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में, पार्टी संगठन में और जब हम विपक्ष में थे तब भी मुझे विभिन्न दायित्व सौंपा। मैं अब इससे अधिक की अपेक्षा कर भी नहीं सकता था।’’
महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को बढ़ाया
बता दें कि पेशे से वकील रह चुके जेटली 2009 से 2014 के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता रह चुके हैं। वे मोदी के मंत्रिमंडल में सबसे महत्वपूर्ण मंत्री रहे हैं। उन्होंने अक्सर सरकार के लिये मुख्य संकटमोचक का काम किया है। जेटली ने वित्त मंत्री रहते हुए संसद में जीएसटी जैसे महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को बढ़ाया। यह दो दशक से लंबित था। वह तीन तलाक जैसे मुद्दों पर आये कानूनों को आगे लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। राफेल सौदे का बचाव करने में भी वह बहुत मुखर रहे।

गौरतलब है‌ कि जेटली खराब स्वास्थ्य के कारण इस बार चुनाव नहीं लड़े । वर्ष 2014 में वह अपने पहले संसदीय चुनाव में अमृतसर से हार गये थे। जेटली कई साल तक पार्टी के प्रवक्ता रहे । वह पहली बार 47 वर्ष की उम्र में गुजरात से राज्यसभा पहुंचे। तब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे। निवर्तमान वित्त मंत्री जेटली, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे। जब मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया। उन्होंने कुछ समय तक रक्षा मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का भी काम संभाला।

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