बुकर पुरस्कार विजेता जोखा अल हार्सी पहुंचीं जयपुर साहित्य महोत्सव में, लेखन चुनौतियों का जिक्र किया

जयपुरः ओमान की लेखिका एवं बुकर पुरस्कार विजेता जोखा अल हार्सी के लिए लेखन का सबसे दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण पहलू समाज में मौजूद अनसुनी और तर्कहीन कहानियों को तर्क, अनुशासन के साथ कहना है, जो एक उपन्यास की मांग होती है।

अल हार्सी जयपुर में चल रहे जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) में आए वक्ताओं में से एक हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने लेखन का रुख इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगा कि यह जरूरी है और इसके लिए उन्होंने लोगों, किताबों और समाज से प्रेरणा ली। उन्होंने बताया, ‘‘लेखन की सबसे अधिक दिलचस्प बात यह है कि समाज में कहानियां भरी पड़ी हैं जो अनसुनी और तर्कहीन होती हैं लेकिन जब आप लिखते हैं तो आप तर्क के बगैर नहीं लिख सकते। उपन्यास एक खाका और अनुशासन मांगता है और यही लेखन को चुनौतीपूर्ण अनुभव बनाता है।’’

अल हार्सी ऐसी पहली अरब महिला हैं जिन्होंने पिछले साल अपने उपन्यास ‘‘सेलेस्टियल बॉडीज’’ के लिए बुकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीता। उनके अनुसार एक वैश्विक लेखक होने का यह मतलब नहीं है कि सिर्फ वैश्विक जगहों के बारे में लिखा जाए। उन्होंने कहा, ‘‘दरअसल यह उलट बात है। आप जो जानते हैं, उसी के बारे में और एक खास तरह के जीवन जीने के तरीके के बारे में लिखते हैं। फिर जो आप लिखते हैं, उस पर प्रतिक्रिया होती है।’’

लेखिका ने कहा, ‘‘हम सभी में सामान्य मानवीय अनुभव होते हैं जो सार्वभौम है। इसलिए गैब्रिएल गार्सिया मार्केज दुनिया भर में मशहूर हैं जबकि वह स्थानीय लोगों और जगहों के बारे में लिखते हैं।’’

‘‘सेलेस्टियल बॉडीज’’ में ओमान के एक गांव और तीन बहनों की कहानी है। माया जिसकी दिल टूटने के बाद एक रईस परिवार में शादी हो जाती है, आसमा जो फर्ज के लिए शादी करती है और खावला एक ऐसे शख्स का इंतजार करती है जो कनाडा में बस गया है। लेखिका मेरिलीन बूथ ने इस किताब को अंग्रेजी में अनुवाद किया है।

जयपुर जर्नल्स का विमोचन

जयपुर साहित्य महोत्सव के साल दर साल आयोजन पर आधारित किताब ‘जयपुर जर्नल्स’ का 13वें जयपुर साहित्य महोत्सव में विमोचन किया गया। यह किताब लेखिका नमिता गोखले ने लिखी है। दुनिया में सबसे बड़े मुक्त साहित्य कार्यक्रम के तौर पर विख्यात जेएलएफ की जीवंत, बहुभाषी महोत्सव की पृष्ठभूमि से इतर किताब में लेखक बनने की प्रेरणाओं और दिल की बात कही गई है। किताब का विमोचन लेखक एवं नेता शशि थरूर ने किया। किताब में उनका का भी जिक्र है।

स्नेहा पामनेजा को मिला सर्वश्रेष्ठ पुस्तक आवरण पुरस्कार

ग्राफिक डिजाइनर स्नेहा पामनेजा को ‘‘टिफिन: ऑथेंटिक रेसिपीज सेलिब्रेटिंग इंडियाज रीजनल क्यूजीन’’ पुस्तक का आवरण डिजाइन करने के लिए इस वर्ष का ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर बुक कवर पुरस्कार प्रदान किया गया। इसमें एक ट्रॉफी और एक लाख रुपए था। उन्हें यह पुरस्कार निर्णायक मंडल ने दिया जिसमें शशि थरूर, जेएलएफ की निदेशक और लेखिका नमिता गोखले और स्तंभकार शोभा डे शामिल हैं। पुस्तक सोनल वेद ने लिखी है और इसे रोली बुक्स ने प्रकाशित किया है। इसके अतिरिक्त तीन अन्य डिजाइनरों को पुस्तक का आवरण डिजाइन करने के लिए स्पेशल ज्यूरी पुरस्कार दिया गया।

प्रेमचंद की कहानियों का भी जिक्र

साहित्यकारों ने कहा कि प्रेमचंद कहानी में आधुनिकता के ध्वजवाहक थे जिन्होंने इस विधा को नयी जुबान दी और अपने समय के हर विषय पर खूब लिखा। जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएल) के तीसरे दिन शनिवार को व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई के प्रसिद्ध व्यंग्य ‘प्रेमचंद के फटे जूते’’ पर आयोजित सत्र में प्रेमचंद की पौत्री और लेखिका सारा राय, लेखक अनीसुर्रहमान और लेखिका वाणी त्रिपाठी टिक्कू ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व और लेखन पर चर्चा की। सारा राय ने कहा कि जिस फोटो पर यह आलेख लिखा गया, उस फोटो का इतिहास तो उन्हें पता नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि उनके परिवार में फोटो खिंचवाने का किसी को बहुत ज्यादा शौक नहीं था और प्रेमचंद तो इतना लिखते थे, कि उन्हें कुछ और याद ही नहीं रहता था।

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