बालाकोट हवाई हमले में मारे गए थे जैश के 170 आतंकी, 45 का इजाज अब भी जारी: इटैलियन पत्रकार

नई दिल्लीः 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायु सेना द्वारा किए गए हवाई हमले को लेकर इटली की एक पत्रकार ने बड़ा खुलासा किया है। पत्रकार फ्रेंसेसा मैरिनो ने स्ट्रिंगर एशिया पर अपना लेख प्रकाशित करते हुए लिखा है कि, हमले में घायल हुए 45 आतंकियों का इलाज अब भी किया जा रहा है। उन्होंने आगे लिखा है कि ‘भारतीय वायु सेना ने तड़के साढ़े तीन बजे हमला किया था। भारतीय वायुसेना की कार्रवाई में जैश-ए-मोहम्मद के 130 से 170 आतंकी मारे गए थे।मैरिनो ने इस घटना का पूरा विवरण छापकर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।

बता दें कि, जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आत्‍मघाती हमले के 13 दिन बाद भारत ने बालाकोट में हवाई हमला किया था। हालांकि पाकिस्तान हमेशा से हवाई हमले से इनकार करते आ रहा है।

45 घायल आतंकियाें का इलाज चल रहा है

मैरिनो ने लिखा कि, पाकिस्तानी सेना के करीबी कैम्पों में से एक शिनकारी से एक टुकड़ी हमले की खबर सुनकर 6 बजे वहां प‌हुंची। बालाकोट से शिनकारी 20 किलोमीटर दूर है। शिनकारी ही पाकिस्तान आर्मी के जूनियर लीडर्स का बेस कैम्प भी है। यूनिट ने वहां पहुंचकर घायलों को हरकत-उल-मुजाहिदीन के कैम्प में पहुंचाया। वहां पाकिस्तान आर्मी के डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि वहां अब भी 45 आतंकियों का इलाज चल रहा है। 20 की इलाज के दौरान मौत हो गई।

मारे मए आतंकियों की संख्या 130-170

मैरिनो ने बताया कि ‘इलाज के बाद जो लोग ठीक हो गए हैं उन्हें पाकिस्तान आर्मी ने अपने हिरासत में ले लिया है। कई हफ्तों से छानबीन कर अपने खुफिया सूत्रों के माध्यम से जो जानकारी मैंने जुटाई है, उसके मुताबिक कहा जा सकता है कि हमले में जैश-ए-मोहम्मद के कई कैडर मारे गए हैं। मृतकों की संख्या 130-170 तक हो सकती है। इसमें वे लोग भी हैं जिनकी मौत इलाज के दौरान हुई है।’

मृतकों में बम बनाने वाले और ट्रेनिंग देने वाले भी शामिल

मैरिनो ने आगे बताया, ‘जो कैडर (आतंकी) मारे गए उनमें 11 ट्रेनर भी हैं। मृतकों में कुछ बम बनाने और हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने वाले भी लोग हैं। जिन परिवारों के लोग इस हमले में मारे गए, उनकी ओर से कोई जानकारी बाहर लीक न हो, इसके लिए भी जैश-ए-मोहम्मद ने पूरे बंदोबस्त किए। मृतकों के घर जाकर जैश के आतंकियों ने मुआवजे के तौर पर नकद राशि दी।

कैम्प पर अब भी है सेना का ही कब्जा

बालाकोट कैम्प के निचले हिस्से में ‘ब्लू पाइन होटल’ है। इसके बगल में अब नया साइन बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है- तालीम-उल-कुरान। पहले यहां जैश के साइन बोर्ड हुआ करते थे। कैम्प पर अब भी सेना का ही कब्जा है। कैप्टन रैंक का एक अधिकारी यहां प्रशासन संभाल रहा है। इस लेख के मुताबिक, ‘स्थानीय नागरिक तो क्या स्थानीय पुलिस भी कैम्प के आसपास तक नहीं जा सकती। पुराने लोगों में से यहां कुछ बच्चे और 4 अध्यापक ही बचे हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि क्यों हमले के बाद कैम्प से मलबा निकालकर उसे कुन्हार नदी में फेंका गया। जैश के लोग दावा कर रहे हैं कि वो हमले का बदला जरूर लेंगे।’


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