बाबरी विध्वंस पर सीबीआई अदालत के फैसले से पूरा हिंदू समाज प्रसन्न

उच्चतम न्यायालय के निर्णय की तरह इस फैसले का भी सम्मान करें मुसलमान: अंसारी
लखनऊ/नयी दिल्ली :बाबरी विध्वंस मामले में लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सभी अभियुक्तों को बरी किये जाने पर विभिन्न व्यक्तियों व संगठनों प्रतिक्रिया इस प्रकार रही।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद  : बुधवार को अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस पर जो फैसला सुनाया है, उससे हम सब संत ही नहीं, पूरा सनातन धर्म और हिंदू समाज इतना खुश है कि उसके मुख से जय श्रीराम और महादेव के अलावा कुछ नहीं निकल रहा है। राम के कार्य में कोई अपराध नहीं होता है। यह घटना कोई पूर्व नियोजित नहीं थी जैसा कि माननीय न्यायाधीश ने भी कहा है। सभी को बरी कर दिया गया क्योंकि किसी का कोई अपराध नहीं था। यह काम भगवान राम का था और उन्होंने अपना काम कराया। न्याय की अदालत में सत्य की जीत होती है। हम सभी संत महात्मा, हिंदू धर्म मानने वाले सभी लोग सत्य के मार्ग पर चलते हैं, इसलिए हमारी हमेशा जीत होती है। सभी का न्यायालय में विश्वास होना चाहिए व जो लोग न्यायालय में विश्वास नहीं करते वे राष्ट्रद्रोही हैं।
‘जय श्री राम’ : आडवाणी: वयोवृद्ध भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी अदालत के फैसले के बाद अपने कमरे से बाहर निकले और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए मीडिया का अभिवादन किया। अदालत जब अपना फैसला सुना रही थी उस वक्त आडवाणी पुत्री प्रतिभा आडवाणी व अपने परिवार के सदस्यों के साथ टेलीविजन देख रहे थे।
सच्चाई की जीत हुई : शिवसेना के पूर्व सांसद प्रधान: बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले के अभियुक्त एवं शिवसेना के पूर्व सांसद सतीश प्रधान (80) ने कहा कि ‘सच्चाई की जीत हुई है। सच की हमेशा जीत होती है। न्यायपालिका में हमारा पूरा भरोसा है।’ प्रधान एक समय शिवसेना सुप्रीमो दिवंगत बाल ठाकरे के विश्वसनीय सहयोगी थे और उन्होंने कोंकण क्षेत्र एवं महाराष्ट्र में पार्टी के विस्तार में मदद की थी। मामला छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा ढहाए जाने से जुड़ा हुआ है।
सत्य की विजय हुई : विहिप : विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे ने कहा कि सत्य की विजय हुई है। अदालत का फैसला आने में करीब 28 साल लगे लेकिन यह बात पहले से स्पष्ट है कि यह घटना पूर्व नियोजित नहीं थी और देश भर से कारसेवकों को ढांचा गिराने के लिए अयोध्या नहीं बुलाया गया था। मध्यप्रदेश और राजस्थान के उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश कोकजे ने कहा कि उस वक्त हिन्दू समुदाय के लोग राम मंदिर मामले में कांग्रेस के रवैये से बेहद आक्रोशित थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना को लेकर विहिप पर जो आरोप लगाए गए, वे हास्यास्पद थे।
फैसला ऐतिहासिक : जोशी : वरिष्ठ भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने फैसले को ‘ऐतिहासिक’ करार देते हुए उम्मीद जताई कि इसी के साथ ही विवाद की भी इतिश्री हो जानी चाहिए। अधिवक्ताओं ने सही पक्षों और तथ्यों को न्यायालय के सामने रखा। उनका परिश्रम था, जिससे इस जटिल मामले में भरपूर प्रयत्नों के बाद सीबीआई अपना पक्ष नहीं रख पायी और न्यायाधीश ने सच को सबके सामने रख दिया। इस निर्णय ने सिद्ध कर दिया है कि हमारे कार्यक्रम किसी षड्यंत्र के तहत नहीं थे। ‘जय जय श्री राम’ और ‘सबको सन्मति दे भगवान’।
‘सत्यमेव जयते’ के अनुरूप सत्य की जीत हुई है: योगी : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘सत्यमेव जयते’ के अनुरूप सत्य की जीत हुई है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर वोट बैंक की राजनीति के लिए देश के पूज्य संतों, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं, विश्व हिंदू परिषद से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों को बदनाम करने की नीयत से उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाकर बदनाम किया गया। इस षड्यंत्र के लिए जिम्मेदार लोग देश की जनता से माफी मांगें।
फैसला ‘सत्य की जीत’ : भाजपा : भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने फैसले को ‘सत्य की जीत’ करार दिया। भाजपा के संगठन महासचिव बी एल संतोष ने ट्वीट किया, ‘बाबरी इमारत विध्वंस मामले में सभी 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया गया है। अदालत ने विध्वंस के पीछ किसी प्रकार के षड्यंत्र होने की बात को खारिज किया है। अदालत ने माना है कि विध्वंस उकसावे की तात्कालिक प्रतिक्रिया का परिणाम था। सत्य की जीत होती है।’
न्याय की जीत : राजनाथ : रक्षा मंत्री और पूर्व भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने ने ट्वीट किया, ‘निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है।’
इस मामले को आगे लेकर न जायें मुसलमान: अंसारी: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने विशेष सीबीआई अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए मुसलमानों से अपील की कि वह उच्चतम न्यायालय के निर्णय की तरह विशेष अदालत के फैसले का भी सम्मान करें। अच्छी बात है, सबको बरी कर दिया गया। वैसे जो कुछ भी होना था वह पिछले साल नौ नवम्बर को चुका है। यह मुकदमा भी उसी दिन खत्म हो जाना चाहिए था। यह मुकदमा सीबीआई का है। मुसलमानों से अपील है कि वह इस मामले को आगे लेकर न जाएं। जैसे नौ नवम्बर के फैसले का सम्मान किया था, वैसे ही इसका भी करें।

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