बसंत पंचमी आजः सरस्वती माता को प्रिय हैं ये चीजें, प्रसाद में जरूर करें शामिल

कोलकाताः बसंत की देवी मां सरस्‍वती को माना जाता है और उनके जन्‍मोत्‍सव के साथ ही बसंत ऋतु का स्‍वागत किया जाता है। खेतों में पीली सरसों के फूल प्रकृति की गोद को पीली चादर से ढक देते हैं। वहीं मां सरस्‍वती का प्रिय रंग भी पीतांबर माना जाता है। इसलिए उनकी पूजा में हर वस्‍तु पीतवर्णित हो इस बात का विशेष ध्‍यान रखना चाहिए। आज के दिन पूरा माहौल मां सरस्‍वती की भक्ति के रंग में सराबोर होता है। मां सरस्‍वती को ज्ञान, विद्या, व्‍यापार की देवी माना जाता है। संगीतकार, कलाकार, पढ़ने वाले बच्‍चे और नौकरी करने वाले सभी लोग मां सरस्‍वती की इस दिन आराधना करते हैं और मां को उनका प्रिय भोग लगाकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। इसी संबंध में आज हम आपको बता रहे हैं मां सरस्‍वती की प्रिय वस्‍तुएं…
इन वस्‍तुओं का लगाएं भोग
बसंत पंचमी के दिन पीले वस्‍त्र पहनकर मां सरस्‍वती की पूजा की जाती है और उन्‍हें पीली वस्‍तुओं का भोग लगाया जाता है। आप स्‍नान के पश्‍चात पीले वस्‍त्र धारण करें और घर में साफ-सफाई के साथ पीले मीठे चावल पकाएं। इसमें आपको केसर का प्रयोग करना चाहिए। केसर न हो तो आप चावलों को पीला करने के लिए हल्‍दी भी ले सकते हैं। इसके साथ ही प्रसाद में पीले लड्डू, बूंदी, बेर, केला और मालपुआ का भी प्रयोग कर सकते हैं। पूजा के बाद आपको आस-पड़ोस में प्रसाद भी बांटना चाहिए।

पीले फूलों से करें मां सरस्‍वती का श्रृंगार
बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के फूलों से मां का श्रृंगार करना चाहिए और उनके स्‍थान सजाना लिए। इसके लिए आप घर में लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और उस पर मां सरस्‍वती की प्रतिमा स्‍थापित करें और उस स्‍थान को पीले फूलों से सजा दें। मां की तस्‍वीर पर पीले रंग के फूलों की माला भी चढ़ाएं। इस दिन विष्‍णुजी की तस्‍वीर पर भी पीले रंग के फूल अर्पित करने चाहिए। माना जाता है कि विष्‍णुजी को प्रसन्‍न करने से उनकी पत्‍नी मां लक्ष्‍मी का भी आशीर्वाद मिलता है।
सरस्‍वती पूजा सामग्री
मां सरस्‍वती पूजा में मुख्य रूप से पीली और सफेद वस्‍तुओं का प्रयोग होता है। पूजा करने में आपके पास दूध दही मक्खन धान का लावा, सफेद तिल का लड्डू, गन्ना, एवं गन्ने का रस, पका हुआ गुड़, मधु, श्वेद चंदन, श्वेत पुष्प, श्वेत परिधान, श्वेत अलंकार, खोवे का श्वेत मिष्टान, अदरक, मूली, शर्करा, सफेद धान के अक्षत, तण्डुल, शुक्ल मोदक, धृत, सैन्धवयुक्त हविष्यान्न, यवचूर्ण या गोधूमचूर्णका धृतसंयुक्त पिष्टक, पके हुए केले की फली का पिष्टक, नारियल, नारियल का जल, श्रीफल, बदरीफल, ऋतुकालोभ्दव पुष्प फल आदि होना चाहिए।

 

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