प्लाज्मा थेरेपी से करें कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीजों का इलाज : सीडीएससीओ

नयी दिल्ली : केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि ‘कॉन्वलसेंट प्लाज्मा’ (थेरेपी) का इस्तेमाल उन हल्के लक्षण वाले कोविड-19 मरीजों में किया जा सकता है, जिनकी हालत में स्टेरॉयड देने के बाद भी कोई सुधार नहीं है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 27 जून को अद्यतन किए गए ‘नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल’ के संबंध में बुधवार को यह नोटिस जारी किया गया। मंत्रालय ने कोविड-19 के हल्के लक्षण वाले मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा थेरेपी की अनुमति दे दी थी।
नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल
सीडीएससीओ ने ‘ इन्फोर्मेशन ऑन कॉन्वलसेंट प्लाज्मा इन कोविड-19’ शीर्षक से जारी किए नोटिस में कहा, ‘ यह भारत सरकार द्वारा जारी ‘नैदानिक प्रबंधन प्रोटोकॉल’ के संबंध में है, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ थैरेपी का जिक्र अनुसंधानात्मक थेरेपी के तौर पर किया है, जिसमें प्लास्माफेरेसिस द्वारा कॉन्वलसेंट प्लाज्मा को कोविड-19 में ‘ऑफ-लेबल’ के रूप में इंगित किया गया है।’ ‘ऑफ-लेबल’ से यहां तात्पर्य, आधिकारिक रूप से सिद्ध ना होने पर भी किसी दवा या किसी थेरेपी का इस्तेमाल किसी बीमारी के इलाज के लिए करने से है।
रक्त से ली जाती है एंटीबॉडी
नोटिस में कहा गया है, ‘ कॉन्वलसेंट प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल उन हल्के लक्षण वाले कोविड-19 मरीजों के लिए जा सकता है, जिनकी हालत स्टेरॉयड देने के बावजूद बेहतर नहीं हो रही है।’ प्लाज्मा थेरेपी में कोविड-19 के ठीक हो चुके मरीजों के रक्त से एंटीबॉडी ली जाती हैं और कोविड-19 मरीजों को चढ़ायी जाती है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सुबह आठ बजे अद्यतन किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में कोविड-19 के मामले गुरुवार को छह लाख के पार पहुंच गए और इससे जान गंवाने वालों की संख्या 17,834 हो गई है।

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